रविवार की रात बिग बॉस 12 के विजेता के नाम का ऐलान हो गया. टेलीविजन एक्टर दीपिका कक्कड़ रियलिटी शो बिग बॉस 12 फ़िनाले की विजेता रहीं.
उन्होंने बेहद कड़े मुक़ाबले में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य रहे एस श्रीसंत को हराया. इनाम के तौर पर दीपिका को 30 लाख रुपये की धनराशि और ट्रॉफी दी गई.
कार्यक्रम के मेज़बान सलमान ख़ान ने दीपिका की जीत की घोषणा की. तीसरे नंबर पर रहे दीपक ठाकुर, जो 20 लाख रुपये की रकम लेकर शो से बाहर हुए.
कलर्स टेलिविज़न पर आने वाले सीरियल 'ससुराल सिमर का' से लोकप्रिय हुईं दीपिका कक्कड़ की जीत ने एक बार फिर साबित किया कि बिग बॉस की हॉट सीट पर 'टेलीविज़न की बहू' की दावेदारी भारी पड़ती है.
दीपिका से पहले शिल्पा शिंदे, उर्वशी ढोलकिया, जूही परमार और श्वेता तिवारी अपने साथ ट्रॉफी लेकर ही बिग बॉस के घर से बाहर निकली हैं.
दीपिका की बिग बॉस में एंट्री
बिग बॉस के साथ विवाद तो लगे ही रहते हैं और दर्शकों के बीच ये इसलिए भी लोकप्रिय हैं क्योंकि इसमें चौंकाने वाला मसाला खूब होता है.
दीपिका की बिग बॉस में एंट्री कुछ चौंकाने वाली नहीं थी. जिस दिन शो के प्रीमियर वाली रात थी, दीपिका के पति और टेलीविज़न एक्टर शोएब इब्राहिम, उन्हें अपनी बाहों में उठाकर बिग बॉस के घर के दरवाज़े तक लेकर गए.
दीपिका 'ससुराल सिमर का' के को-एक्टर शोएब इब्राहिम के साथ 2015 से रिलेशनशिप में थी और उन्होंने 22 फ़रवरी 2018 को इस्लाम अपनाते हुए उनसे निकाह किया था.
2009 में दीपिका नेरौनक सैमसन से पहली शादी की थी, लेकिन ये शादी ज़्यादा नहीं चली और दोनों के बीच तलाक हो गया.
जब दीपिका बिग बॉस के घर पहुँची तो दर्शकों में ये जानने की दिलचस्पी थी कि दीपिका कितने दिनों तक बिग बॉस के घर में टिकेंगी और क्या वो अपने पति शोएब से दूर रह सकेंगी.
शो के शुरुआती दिनों में दीपिका के लिए घर में अपनी जगह बना पाना भी काफ़ी मुश्किल रहा था और बिग बॉस के दूसरे प्रतिभागियों के साथ घुलने-मिलने में भी उन्होंने ख़ासा समय लिया.
बिग बॉस के घर में दीपिका की श्रीसंत के साथ गाढ़ी दोस्ती देखने को मिली. इसके अलावा उनके रिश्ते नेहा पिंडसे और जसलीन मथारू के साथ भी मधुर दिखे. दूसरे सदस्यों के साथ तीखी नोक-झोंक के दौरान श्रीसंत को दीपिका का साथ देते हुए देखा गया.
फ़िनाले में पहुँचे पाँच प्रतिभागियों में से दीपिका इकलौती महिला थी. लेकिन बिग बॉस में एक बार फिर से इतिहास दोहराया गया और टेलीविज़न की बहू पर दर्शकों ने भरपूर प्यार लुटाया और दीपिका को विजेता बनाया.
'ससुराल सिमर का' से पहले दीपिका ने 'नीर भरे तेरे नैना' और 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' में भी काम किया था.दीपिका के पिता सेना में थे. जे पी दत्ता की फिल्म 'पलटन' से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया था और फ़िल्म में उनके काम की सराहना भी हु
जैसे ही बिग बॉस 12 फ़िनाले के विजेता की घोषणा हुई, सोशल मीडिया ख़ासकर ट्विटर पर एक के बाद एक कई प्रतिक्रियाएं आने लगीं.
कुछ लोगों ने दीपिका को जीत के लिए बधाई दी तो किसी ने इसे फ़ेक तक कह डाला.
विकास गाँधी ने लिखा, "बिग बॉस का ये सीज़न पूरी तरह से फ़ेक रहा. हम सभी बिग बॉस देखने वालों ने अपना समय बर्बाद किया."\
सैम गिल ने लिखा, "मुझे किसी रियलिटी शो में इतना बुरा नहीं लगा. श्रीसंत को कितनी तकलीफ हुई. सभी प्रतिभागियों ने उनके साथ बुरा किया. जीतने वाली उनकी नकली बहन ने भी उनका इस्तेमाल किया. उन्होंने अपनी इज़्ज़त को दांव पर लगाया लेकिन टीआरपी के लिए कलर्स चैनल ने उनका इस्तेमाल किया."
Sunday, December 30, 2018
Wednesday, December 26, 2018
फीचर फोन लाने के बाद अब इस बड़ी तैयारी में कंपनी
रिलायंस जियो ने पहले अपने सस्ता डेटा देकर और फिर जियोफोन लॉन्च कर तहलका मचाया. अब खबर मिली है कि कंपनी पार्टनर्स के साथ मिलकर बड़ी स्क्रीन वाला सस्ता स्मार्टफोन लाने की तैयारी में है. कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि ये स्मार्टफोन उन लोगों के लिए होगा जो पहली बार फीचर फोन से पहली बार 4G डिवाइस में शिफ्ट होना चाहते हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स को रिलायंस जियो पर चैनल डेवलपमेंट के सेल्स हेड सुनील दत्त ने बताया कि हम उन साझेदारों के साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जो एक बड़े पैमाने पर उन ग्राहकों के लिए बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्टफोन ला सकें जो 4G स्मार्टफोन में शिफ्ट होना चाहते हैं. ताकि वे सही तरह की कनेक्टिविटी और साथ ही डिवाइसेज पर सही तरह के कंटेंट का अनुभव कर सकें और जो किफायती भी हो.
भविष्य में लॉन्च किए जाने वाले डिवाइस के बारे में पूछे जाने पर दत्त ने कहा, हम हर कुछ महीनों में कुछ नया लेकर आते रहेंगे.
ET ने हाल ही में बताया था कि Jio अमेरिकी कॉन्ट्रैक्ट निर्माता फ्लेक्स के साथ स्थानीय रूप से लगभग 100 करोड़ स्मार्टफोन बनाने के लिए बातचीत कर रहा है क्योंकि मुकेश अंबानी की स्वामित्व वाली टेलीकॉम कंपनी फीचर फोन का उपयोग करने वाले अधिकांश लोगों तक पहुंच बना कर अपना बाजार में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाना चाहती है.
Jio पहली बार के खरीदारों के लिए स्मार्टफोन की प्रभावी लागत को कम इसे किफायती बनाने के लिए Apple, Samsung, Xiaomi, Oppo जैसे टॉप हैंडसेट ब्रांड पार्टनर्स के साथ मिलकर ऑफर भी देता है.
अकसर देखा गया है कि ITR फॉर्म भरने में लोगों को काफी परेशानी होती है. लेकिन आपकी यह परेशानी नए साल में दूर हो सकती है. दरअसल, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने संकेत दिए हैं कि टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले लोगों को जल्द ही पहले से भरे हुए ITR फॉर्म मिलेंगे. इससे रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी. यानि आपको पहले से भरा हुआ ITR फॉर्म मिलेगा और आपको उसमें सिर्फ संशोधन करने होंगे.
फंसा हुआ पैसा निकालना होगा आसान
कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान पैसे फंस जाते हैं या ट्रांजेक्शन में दिक्कत होती है. इन परेशानियों को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक नए साल में डिजिटल ट्रांजेक्शन ओम्बड्समैन की शुरुआत कर सकती है. इसके शुरू होने के बाद अगर आपका पैसा इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए फंस जाता है या ट्रांजेक्शन फेल होता है तो आप ओम्बड्समैन यानी लोकपाल से शिकायत कर सकेंगे. यह लोकपाल आपकी समस्या को दूर करने में मदद करेगी.
इकोनॉमिक टाइम्स को रिलायंस जियो पर चैनल डेवलपमेंट के सेल्स हेड सुनील दत्त ने बताया कि हम उन साझेदारों के साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जो एक बड़े पैमाने पर उन ग्राहकों के लिए बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्टफोन ला सकें जो 4G स्मार्टफोन में शिफ्ट होना चाहते हैं. ताकि वे सही तरह की कनेक्टिविटी और साथ ही डिवाइसेज पर सही तरह के कंटेंट का अनुभव कर सकें और जो किफायती भी हो.
भविष्य में लॉन्च किए जाने वाले डिवाइस के बारे में पूछे जाने पर दत्त ने कहा, हम हर कुछ महीनों में कुछ नया लेकर आते रहेंगे.
ET ने हाल ही में बताया था कि Jio अमेरिकी कॉन्ट्रैक्ट निर्माता फ्लेक्स के साथ स्थानीय रूप से लगभग 100 करोड़ स्मार्टफोन बनाने के लिए बातचीत कर रहा है क्योंकि मुकेश अंबानी की स्वामित्व वाली टेलीकॉम कंपनी फीचर फोन का उपयोग करने वाले अधिकांश लोगों तक पहुंच बना कर अपना बाजार में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाना चाहती है.
Jio पहली बार के खरीदारों के लिए स्मार्टफोन की प्रभावी लागत को कम इसे किफायती बनाने के लिए Apple, Samsung, Xiaomi, Oppo जैसे टॉप हैंडसेट ब्रांड पार्टनर्स के साथ मिलकर ऑफर भी देता है.
अकसर देखा गया है कि ITR फॉर्म भरने में लोगों को काफी परेशानी होती है. लेकिन आपकी यह परेशानी नए साल में दूर हो सकती है. दरअसल, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने संकेत दिए हैं कि टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले लोगों को जल्द ही पहले से भरे हुए ITR फॉर्म मिलेंगे. इससे रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी. यानि आपको पहले से भरा हुआ ITR फॉर्म मिलेगा और आपको उसमें सिर्फ संशोधन करने होंगे.
फंसा हुआ पैसा निकालना होगा आसान
कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान पैसे फंस जाते हैं या ट्रांजेक्शन में दिक्कत होती है. इन परेशानियों को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक नए साल में डिजिटल ट्रांजेक्शन ओम्बड्समैन की शुरुआत कर सकती है. इसके शुरू होने के बाद अगर आपका पैसा इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए फंस जाता है या ट्रांजेक्शन फेल होता है तो आप ओम्बड्समैन यानी लोकपाल से शिकायत कर सकेंगे. यह लोकपाल आपकी समस्या को दूर करने में मदद करेगी.
Sunday, December 16, 2018
प्रियंका का पर्दे के पीछे रहना क्या कांग्रेस की रणनीति है?
11 दिसंबर को जैसे-जैसे चुनाव के फ़ैसले आते गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जय-जयकार बढ़ती ही जा रही थी लेकिन एक चेहरा जो हमेशा राहुल के इर्द गिर्द दिखता था वो इस चुनावी मौसम में एक दम नहीं दिखा.
वो चेहरा था राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी का.
वो प्रियंका गांधी जिन्होंने राहुल गांधी की पहली चुनावी रैली में अपने भाई को बाकायदा आगे बढ़ाया था.
अगर तस्वीरों पर नज़र डालें तो सबसे ज़्यादा वो तस्वीरें उभरती हैं जिसमें लोगों के बीच में राहुल और प्रियंका बैठे हैं और राहुल ने प्रियंका के कंधे पर हाथ रखा हुआ है.
तो कहां गई प्रियंका गांधी? क्या कांग्रेस के राजनीतिक पटल से प्रियंका एकदम गायब हो चुकी हैं?
कहां गई प्रियंका गांधी
इस चुनावी मौसम राहुल गांधी की रैलियां या बयान काफ़ी चर्चा में रहे. प्रधानमंत्री मोदी पर उनके आरोपों ने काफ़ी सुर्खियां बटोरी लेकिन राहुल गांधी को आगे बढ़ाती प्रियंका न किसी रैली में दिखीं न ही ख़बरों में.
और तो और ये पहला चुनावी मौसम था जिसमें प्रियंका गांधी की चर्चा भी नहीं की गई.
गुजरात चुनाव के दौरान जहां राहुल गांधी के नए रूप को बार बार देखा गया, वहां प्रियंका की सक्रियता भी दिखती थी.
कांग्रेस अधिवेशन में मंच पर भले ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला था लेकिन मंच के पीछे का इंतजाम प्रियंका गांधी ने ही अपने जिम्मे लिया था.
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक प्रियंका ने एक अच्छे प्रशासक की तरह छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा था. एक तरफ वो मच्छरों से निजात पाने के लिए स्प्रे कराती हुई नज़र आई थीं तो साथ ही पर्दे के पीछे से वॉकी-टॉकी लेकर इंतज़ाम में तालमेल बनाती नज़र आईं थी.
इतना ही नहीं, प्रियंका ने ही मंच पर बोलने वाले वक्ताओं की सूची को अंतिम रूप दिया और पहली बार युवा और अनुभवी वक्ताओं का एक मिश्रण दिया. यहां तक कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत क़रीब-क़रीब सभी के भाषण के 'फैक्ट चेक' का जिम्मा भी लिया.
वो चेहरा था राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी का.
वो प्रियंका गांधी जिन्होंने राहुल गांधी की पहली चुनावी रैली में अपने भाई को बाकायदा आगे बढ़ाया था.
अगर तस्वीरों पर नज़र डालें तो सबसे ज़्यादा वो तस्वीरें उभरती हैं जिसमें लोगों के बीच में राहुल और प्रियंका बैठे हैं और राहुल ने प्रियंका के कंधे पर हाथ रखा हुआ है.
तो कहां गई प्रियंका गांधी? क्या कांग्रेस के राजनीतिक पटल से प्रियंका एकदम गायब हो चुकी हैं?
कहां गई प्रियंका गांधी
इस चुनावी मौसम राहुल गांधी की रैलियां या बयान काफ़ी चर्चा में रहे. प्रधानमंत्री मोदी पर उनके आरोपों ने काफ़ी सुर्खियां बटोरी लेकिन राहुल गांधी को आगे बढ़ाती प्रियंका न किसी रैली में दिखीं न ही ख़बरों में.
और तो और ये पहला चुनावी मौसम था जिसमें प्रियंका गांधी की चर्चा भी नहीं की गई.
गुजरात चुनाव के दौरान जहां राहुल गांधी के नए रूप को बार बार देखा गया, वहां प्रियंका की सक्रियता भी दिखती थी.
कांग्रेस अधिवेशन में मंच पर भले ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला था लेकिन मंच के पीछे का इंतजाम प्रियंका गांधी ने ही अपने जिम्मे लिया था.
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक प्रियंका ने एक अच्छे प्रशासक की तरह छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा था. एक तरफ वो मच्छरों से निजात पाने के लिए स्प्रे कराती हुई नज़र आई थीं तो साथ ही पर्दे के पीछे से वॉकी-टॉकी लेकर इंतज़ाम में तालमेल बनाती नज़र आईं थी.
इतना ही नहीं, प्रियंका ने ही मंच पर बोलने वाले वक्ताओं की सूची को अंतिम रूप दिया और पहली बार युवा और अनुभवी वक्ताओं का एक मिश्रण दिया. यहां तक कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत क़रीब-क़रीब सभी के भाषण के 'फैक्ट चेक' का जिम्मा भी लिया.
Thursday, December 13, 2018
जिन्होंने मध्य प्रदेश में मोदी-शाह-शिवराज को मात दी
मंगलवार को शाम के छह बजे तक मध्य प्रदेश में मुक़ाबला बराबरी का दिख रहा था तब न्यूज़रूम में ये क़यास लगाए जाने लगे थे कि हो सकता है कि यहां बीजेपी अपनी सरकार बचा ले जाए.
शिवराज सिंह चौहान के विश्वस्त मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा- बाग़ियों से थोड़ा नुक़सान हो रहा है, लेकिन सरकार बना लेंगे हम लोग. थोड़े कम भी हुए भी तो हो जाएगी व्यवस्था.
फिर कांग्रेस ख़ेमे का हाल जानने के लिए कांग्रेस की राजनीति की नब्ज़ रखने के साथ कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा - बीजेपी के कुछ नेताओं को मालूम नहीं है कि उनका पाला इस बार कमलनाथ से पड़ा है, अगर बीजेपी अपने दम पर बहुमत से कम हुई तो सरकार नहीं बना पाएगी.
पहले देर रात राज्यपाल को भेजे ईमेल और आदमी के हाथ से भेजे गए सरकार बनाने के दावे (ध्यान रहे कि कमलनाथ ने फ़ैक्स करने का विकल्प चुना ही नहीं, जिसके चलते महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाते बनाते रह गई थीं) और अगली सुबह राज्यपाल को भेजे गए कुल 121 विधायकों के समर्थन ने साफ़ कर दिया कि 71 साल की उम्र के कमलनाथ हर उस रणनीति के मास्टर हैं जिसकी झलक पिछले कुछ सालों से कांग्रेस में नहीं दिख रही थी.
राज्यपाल को भेजे गए समर्थन वाले पत्र से साफ़ है कि बीजेपी के 109 विधायकों को छोड़ दें तो बाक़ी सब के सब कमलनाथ के साथ हैं. इससे पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक भी हुई जिसमें हर ज़ोर आज़माइश के बाद यही नतीजा निकला कि मैजिक नंबर नहीं मिल पाएगा.
सात महीने में कमल का कमाल
मध्य प्रदेश की राजनीति को नज़दीक से देखने वाले कई विश्लेषक ये दावा करने में जुट गए हैं कि ये करिश्मा मौजूदा समय में मध्यप्रदेश में केवल और केवल कमलनाथ के बूते की बात थी, जो उन्होंने कर दिखाया.
महज़ सात महीने पहले उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रभार संभाला और इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक के गढ़ और हिंदुत्व की राजनीति के केंद्र रहे मध्य प्रदेश में नरेंद्र मोदी-अमित शाह की रणनीति के साथ साथ लोकलुभावन नीतियों के चलते बेहद लोकप्रिय शिवराज सिंह चौहान की हवा निकाल दी.
ये काम उन्होंने तब किया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस बीते कई दशकों से गुटबाज़ी के चलते एक दूसरे की टांग खींचने की परिपाटी रही है. कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता कहते हैं- कमलनाथ की यही ख़ासियत रही है, वो सबको साथ लेकर चलना जानते हैं, रिज़ल्ट देना जानते हैं.
चाहे दिग्विजय सिंह रहे हों या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों के बीच कमलनाथ ने तालमेल बनाते हुए सबको एकजुट रखा और नतीजा सामने है. 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौट आई है.
26 अप्रैल, 2018 को मध्य प्रदेश का प्रभार संभालने के बाद जब कमलनाथ ने भोपाल में अपना डेरा डाला तो सबसे पहले उन्होंने पार्टी कार्यालय की सूरत संवारी. नए सिरे से इमारत का रंग रोगन हुआ और साथ में संजय गांधी की तस्वीर भी लगवाई. मोटा आकलन ये भी लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के चुनाव में क़रीब तीन चौथाई संसाधनों की व्यवस्था कमलनाथ ने ही जुटाई.
ये भी एक बड़ी वजह है कि उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने की तैयारी हो रही है ताकि 2019 के निर्णायक चुनाव के लिए तैयारियों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रह जाए.
हालांकि आलोक मेहता के मुताबिक़ कमलनाथ का केंद्र की राजनीति में मुख्यमंत्री पद के लिहाज़ से बड़ा क़द रहा है लेकिन एनडी तिवारी या शरद पवार जैसे लोग पहले भी राज्यों में जाकर कमान संभालते रहे हैं.
शिवराज सिंह चौहान के विश्वस्त मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा- बाग़ियों से थोड़ा नुक़सान हो रहा है, लेकिन सरकार बना लेंगे हम लोग. थोड़े कम भी हुए भी तो हो जाएगी व्यवस्था.
फिर कांग्रेस ख़ेमे का हाल जानने के लिए कांग्रेस की राजनीति की नब्ज़ रखने के साथ कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा - बीजेपी के कुछ नेताओं को मालूम नहीं है कि उनका पाला इस बार कमलनाथ से पड़ा है, अगर बीजेपी अपने दम पर बहुमत से कम हुई तो सरकार नहीं बना पाएगी.
पहले देर रात राज्यपाल को भेजे ईमेल और आदमी के हाथ से भेजे गए सरकार बनाने के दावे (ध्यान रहे कि कमलनाथ ने फ़ैक्स करने का विकल्प चुना ही नहीं, जिसके चलते महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाते बनाते रह गई थीं) और अगली सुबह राज्यपाल को भेजे गए कुल 121 विधायकों के समर्थन ने साफ़ कर दिया कि 71 साल की उम्र के कमलनाथ हर उस रणनीति के मास्टर हैं जिसकी झलक पिछले कुछ सालों से कांग्रेस में नहीं दिख रही थी.
राज्यपाल को भेजे गए समर्थन वाले पत्र से साफ़ है कि बीजेपी के 109 विधायकों को छोड़ दें तो बाक़ी सब के सब कमलनाथ के साथ हैं. इससे पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक भी हुई जिसमें हर ज़ोर आज़माइश के बाद यही नतीजा निकला कि मैजिक नंबर नहीं मिल पाएगा.
सात महीने में कमल का कमाल
मध्य प्रदेश की राजनीति को नज़दीक से देखने वाले कई विश्लेषक ये दावा करने में जुट गए हैं कि ये करिश्मा मौजूदा समय में मध्यप्रदेश में केवल और केवल कमलनाथ के बूते की बात थी, जो उन्होंने कर दिखाया.
महज़ सात महीने पहले उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रभार संभाला और इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक के गढ़ और हिंदुत्व की राजनीति के केंद्र रहे मध्य प्रदेश में नरेंद्र मोदी-अमित शाह की रणनीति के साथ साथ लोकलुभावन नीतियों के चलते बेहद लोकप्रिय शिवराज सिंह चौहान की हवा निकाल दी.
ये काम उन्होंने तब किया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस बीते कई दशकों से गुटबाज़ी के चलते एक दूसरे की टांग खींचने की परिपाटी रही है. कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता कहते हैं- कमलनाथ की यही ख़ासियत रही है, वो सबको साथ लेकर चलना जानते हैं, रिज़ल्ट देना जानते हैं.
चाहे दिग्विजय सिंह रहे हों या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों के बीच कमलनाथ ने तालमेल बनाते हुए सबको एकजुट रखा और नतीजा सामने है. 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौट आई है.
26 अप्रैल, 2018 को मध्य प्रदेश का प्रभार संभालने के बाद जब कमलनाथ ने भोपाल में अपना डेरा डाला तो सबसे पहले उन्होंने पार्टी कार्यालय की सूरत संवारी. नए सिरे से इमारत का रंग रोगन हुआ और साथ में संजय गांधी की तस्वीर भी लगवाई. मोटा आकलन ये भी लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के चुनाव में क़रीब तीन चौथाई संसाधनों की व्यवस्था कमलनाथ ने ही जुटाई.
ये भी एक बड़ी वजह है कि उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने की तैयारी हो रही है ताकि 2019 के निर्णायक चुनाव के लिए तैयारियों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रह जाए.
हालांकि आलोक मेहता के मुताबिक़ कमलनाथ का केंद्र की राजनीति में मुख्यमंत्री पद के लिहाज़ से बड़ा क़द रहा है लेकिन एनडी तिवारी या शरद पवार जैसे लोग पहले भी राज्यों में जाकर कमान संभालते रहे हैं.
Tuesday, December 11, 2018
对话85后“发际线照”走红民警:青春已逝但格外充实
南方+记者核实了解到,照片中的民警叫王强,1985年出生,现为淮北市公安局相山分局花园派出所副所长。网络流传的照片显示,王强皮肤黝黑,身材微胖,头发比较少,与刚入职时相比,发际线的确后移了不少。
12月10日晚,记者联系到王强,他表示对自己的走红“很意外”。网上流传最多的那张照片,是自己刚和同事抓获了一名盗窃嫌疑犯带回所里。“蹲点了三天两夜,整个人比较疲惫。”
王强说,自己看照片感觉也有点显老,“我工作十年了,忽然感觉十年的青春真是一晃就过去了。”
谈“走红”:感到意外,也是鼓励和鞭策
南方+:什么时候发现自己在网上“火”了?
王强:最近这一个星期吧。快到年底了,工作非常忙,这几天经常收到亲戚朋友转给我的新闻报道,才知道挺多人关注的。与其说大家关注的是我的发际线,不如说大家关注的是一线民警。一线民警多是默默无闻地工作,现在得到关注,我觉得有点激动,也挺骄傲的。大家的关注对我和一线民警是一种鼓励和鞭策。
南方+:什么时候发现自己发际线问题的?
王强:我2007年进入公安系统工作,干了6年特警之后,2013年到派出所工作。从那个时候开始,洗头、梳头时头发掉得比以前多,比以前快。
原因我很难讲清楚,可能和工作有关,民警的生活不规律,压力比较大。据我了解,一线民警当中败顶的现象在年轻化,越来越普遍。除了工作还有生活方面的一些压力,特别是三十多岁之后,上有老,下有小。
谈工作:一线民警都是“时刻准备着”
南方+:平时你和所里面的基层民警是什么工作状态?
王强:作为一线的基层民警,工作基本是“52”“白黑”的状态吧。我们工作时间不是很固定,加班是很普遍的事情,可以说是“时刻准备着”。像最近有任务,已经两天没回家了。如果哪天能七点前回到家,那算很早的了。
南方+:基层民警主要的工作内容有哪些?
王强:辖区里面的大事小事都是我们的工作内容。治安案件,肯定是我们的工作范围。另外,还要处理辖区里面不少琐碎的事情,比如一些家长里短的事,很多居民因为比较信任我们,遇到事情了都喜欢找我们调解。
其实像一些感情纠纷,更要好好处理,不少治安案件都是因为这些“小事”做的导火索。我们就是让这些矛盾在“小事”的阶段就给化解了。
12月10日晚,记者联系到王强,他表示对自己的走红“很意外”。网上流传最多的那张照片,是自己刚和同事抓获了一名盗窃嫌疑犯带回所里。“蹲点了三天两夜,整个人比较疲惫。”
王强说,自己看照片感觉也有点显老,“我工作十年了,忽然感觉十年的青春真是一晃就过去了。”
谈“走红”:感到意外,也是鼓励和鞭策
南方+:什么时候发现自己在网上“火”了?
王强:最近这一个星期吧。快到年底了,工作非常忙,这几天经常收到亲戚朋友转给我的新闻报道,才知道挺多人关注的。与其说大家关注的是我的发际线,不如说大家关注的是一线民警。一线民警多是默默无闻地工作,现在得到关注,我觉得有点激动,也挺骄傲的。大家的关注对我和一线民警是一种鼓励和鞭策。
南方+:什么时候发现自己发际线问题的?
王强:我2007年进入公安系统工作,干了6年特警之后,2013年到派出所工作。从那个时候开始,洗头、梳头时头发掉得比以前多,比以前快。
原因我很难讲清楚,可能和工作有关,民警的生活不规律,压力比较大。据我了解,一线民警当中败顶的现象在年轻化,越来越普遍。除了工作还有生活方面的一些压力,特别是三十多岁之后,上有老,下有小。
谈工作:一线民警都是“时刻准备着”
南方+:平时你和所里面的基层民警是什么工作状态?
王强:作为一线的基层民警,工作基本是“52”“白黑”的状态吧。我们工作时间不是很固定,加班是很普遍的事情,可以说是“时刻准备着”。像最近有任务,已经两天没回家了。如果哪天能七点前回到家,那算很早的了。
南方+:基层民警主要的工作内容有哪些?
王强:辖区里面的大事小事都是我们的工作内容。治安案件,肯定是我们的工作范围。另外,还要处理辖区里面不少琐碎的事情,比如一些家长里短的事,很多居民因为比较信任我们,遇到事情了都喜欢找我们调解。
其实像一些感情纠纷,更要好好处理,不少治安案件都是因为这些“小事”做的导火索。我们就是让这些矛盾在“小事”的阶段就给化解了。
Monday, December 10, 2018
कल होगा 8500 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला
5 राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने में अब 24 घंटे से भी कम का समय बचा है. पूरे देश की नजर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ (Election Results 2018) के नतीजों पर हैं, तीनों राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. और हर जगह बीजेपी की कुर्सी खिसकने का खतरा है. मंगलवार को सभी राज्यों के नतीजे सुबह से ही आने शुरू हो जाएंगे, चुनाव आयोग ने इसके लिए बड़ी तैयारी की है. कल आने वाले नतीजों से पहले उससे जुड़ी कुछ खास बातें यहां पढ़ें...
- मध्य प्रदेश की 230, राजस्थान की 199 और छत्तीसगढ़ की 90 सीटों के नतीजे मंगलवार को घोषित किया जाएंगे. मध्य प्रदेश में पिछले 15 साल से, छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से और राजस्थान में पिछले 5 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.
- मतगणना में सबसे पहले 8 बजे से डाक मतपत्रों की गणना शुरू होगी. इसके बाद सुबह साढ़े 8 बजे से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की कंट्रोल यूनिट से मतगणना शुरू की जाएगी.
- इस बार चक्रवार (राउंडवाइज) मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे जिसके बाद उम्मीदवारों को परिणामों की प्रति भी दी जाएगी. इसके बाद अगले चक्र की मतगणना शुरू होगी.
- आयोग द्वारा निर्देशित किया गया है कि अगले राउंड की गिनती तब तक प्रारंभ नहीं होगी जब तक पहले राउंड की मतगणना की गिनती समाप्त होकर उसके परिणाम डिस्प्ले पर प्रदर्शित न हो जाएं.
- छत्तीसगढ़ में मतगणना के लिए 5184 गणनाकर्मी और 1500 माईक्रोऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं. प्रत्येक हॉल में मतगणना के लिए 14 टेबल, रिटर्निंग ऑफिसर मेज और डाक मतपत्रों की गणना की मेज होगी.
- छत्तीसगढ़ में विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम में डाले गये मतों की प्रत्येक चरण में 14 टेबल पर गणना होगी. सबसे अधिक कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में 30 चरण में गिनती होगी एवं सबसे कम मनेन्द्रगढ़ विधानसभा में 11 चरणों में मतों की गिनती होगी.
- छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को मतदान हुआ था. राजस्थान, तेलंगाना में 7 दिसंबर और मध्य प्रदेश, मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुए थे.
- पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब सबकी निगाहें इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर टिकी हैं. इन चुनावों में इस्तेमाल की गईं 1 लाख 74 हजार ईवीएम में 8500 से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत कैद है.
- मध्य प्रदेश की 230, राजस्थान की 199 और छत्तीसगढ़ की 90 सीटों के नतीजे मंगलवार को घोषित किया जाएंगे. मध्य प्रदेश में पिछले 15 साल से, छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से और राजस्थान में पिछले 5 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.
- मतगणना में सबसे पहले 8 बजे से डाक मतपत्रों की गणना शुरू होगी. इसके बाद सुबह साढ़े 8 बजे से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की कंट्रोल यूनिट से मतगणना शुरू की जाएगी.
- इस बार चक्रवार (राउंडवाइज) मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे जिसके बाद उम्मीदवारों को परिणामों की प्रति भी दी जाएगी. इसके बाद अगले चक्र की मतगणना शुरू होगी.
- आयोग द्वारा निर्देशित किया गया है कि अगले राउंड की गिनती तब तक प्रारंभ नहीं होगी जब तक पहले राउंड की मतगणना की गिनती समाप्त होकर उसके परिणाम डिस्प्ले पर प्रदर्शित न हो जाएं.
- छत्तीसगढ़ में मतगणना के लिए 5184 गणनाकर्मी और 1500 माईक्रोऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं. प्रत्येक हॉल में मतगणना के लिए 14 टेबल, रिटर्निंग ऑफिसर मेज और डाक मतपत्रों की गणना की मेज होगी.
- छत्तीसगढ़ में विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम में डाले गये मतों की प्रत्येक चरण में 14 टेबल पर गणना होगी. सबसे अधिक कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में 30 चरण में गिनती होगी एवं सबसे कम मनेन्द्रगढ़ विधानसभा में 11 चरणों में मतों की गिनती होगी.
- छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को मतदान हुआ था. राजस्थान, तेलंगाना में 7 दिसंबर और मध्य प्रदेश, मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुए थे.
- पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब सबकी निगाहें इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर टिकी हैं. इन चुनावों में इस्तेमाल की गईं 1 लाख 74 हजार ईवीएम में 8500 से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत कैद है.
Tuesday, December 4, 2018
दिल्ली के आश्रय गृह से कहां ग़ायब हो गईं लड़कियाँ?
दिल्ली के दिलशाद गार्डन में स्थित संस्कार आश्रम परिसर के गेट नंबर 3 के बाहर मीडिया और लोगों का जमावड़ा था. पत्रकार इस परिसर में बने लड़कियों के आश्रय गृह तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों की एक-एक व्यक्ति पर नज़र थी. किसी को आश्रय गृह के आसपास भी फटकने नहीं दिया जा रहा था.
लेकिन यही चाकचौबंद व्यवस्था उस दिन नहीं थी जब 1 और 2 दिसंबर की रात को 9 लड़कियां इस आश्रय गृह से अचानक एकसाथ गायब हो गईं. पूरे आश्रय गृह और सुरक्षाकर्मियों को पता ही नहीं चला कि ये लड़कियां कहां गईं.
इन 9 लड़कियों में से एक बिहार की रहने वाली है और बाकी 8 नेपाल से हैं. पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि बिहार की रहने वाली लड़की नाबालिग है.
दो दिसंबर की सुबह आश्रय गृह में जब लड़कियों की हाज़िरी लगाई गई तब पता चला कि नौ लड़कियां गायब हैं. उनके कमरे में देखने पर भी वो नहीं मिलीं.
इसके बाद संकल्प आश्रय ने पुलिस को फोन करके इसकी जानकारी दी और पुलिस मौके पर पहुंची. लेकिन, दो दिन बीत जाने के बाद भी एक भी लड़की का पता नहीं चल सका.
आश्रय गृह ने इस मामले पर अभी तक चुप्पी साधी हुई है और पुलिस भी काफ़ी संभलकर बोल रही है.
शहादरा डीसीपी मेघना यादव ने बताया, ''आश्रय गृह प्रशासन का कहना है कि उसे लड़कियों के गायब होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. इन नौ लड़कियों को रेड लाइट एरिया जीबी रोड से रेसक्यू किया गया था. इसके बाद उन्हें द्वारका के आश्रय गृह में रखा गया था. इसी साल मई में उन्हें द्वारका से संस्कार आश्रम लाया गया.''
ये लड़कियां मानव तस्करी और यौन उत्पीड़न की शिकार रही हैं. पुलिस का कहना है कि इस मामले में बाहरी शख़्स और अंदर के स्टाफ़ की भूमिका की भी जाँच की जा रही है.
दो अधिकारी निलंबित
यह आश्रय गृह महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) के तहत आता है. ये विभाग उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया संभाल रहे हैं. इस घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में पत्र लिखकर उत्तर पूर्व, डब्ल्यूसीडी के ज़िला अधिकारी और संकल्प आश्रय गृह के सुपरिंटेंडेंट को निलंबित कर दिया है.
दिल्ली महिला आयोग (डीसीब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी आश्रय गृह पहुंची थीं. उन्होंने बीबीसी को बताया, ''ये नौ लड़कियां जीबी रोड से निकाली गईं है, ये मुझे पता है. इनमें से कई लड़कियां ऐसी है जिन्हें दिल्ली महिला आयोग ने रेस्क्यू किया है. आख़िर वो लड़कियां कहां गई. एक साथ इतनी लड़कियां सुरक्षा के बीच कैसे गायब हो सकती हैं.''
उन्होंने कहा, ''इस तरह के आश्रय गृहों में सरकार का दख़ल बहुत ज़रूरी है. दिल्ली महिला आयोग भी उनमें लगातार दौरा करेगा. मैं एलजी के पास भी जाऊंगी. जीबी रोड बंद होना चाहिए. ये लड़कियां जीबी रोड पहुंच गई हैं तो क्या ये सिस्टम की ग़लती नहीं है.''
लेकिन यही चाकचौबंद व्यवस्था उस दिन नहीं थी जब 1 और 2 दिसंबर की रात को 9 लड़कियां इस आश्रय गृह से अचानक एकसाथ गायब हो गईं. पूरे आश्रय गृह और सुरक्षाकर्मियों को पता ही नहीं चला कि ये लड़कियां कहां गईं.
इन 9 लड़कियों में से एक बिहार की रहने वाली है और बाकी 8 नेपाल से हैं. पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि बिहार की रहने वाली लड़की नाबालिग है.
दो दिसंबर की सुबह आश्रय गृह में जब लड़कियों की हाज़िरी लगाई गई तब पता चला कि नौ लड़कियां गायब हैं. उनके कमरे में देखने पर भी वो नहीं मिलीं.
इसके बाद संकल्प आश्रय ने पुलिस को फोन करके इसकी जानकारी दी और पुलिस मौके पर पहुंची. लेकिन, दो दिन बीत जाने के बाद भी एक भी लड़की का पता नहीं चल सका.
आश्रय गृह ने इस मामले पर अभी तक चुप्पी साधी हुई है और पुलिस भी काफ़ी संभलकर बोल रही है.
शहादरा डीसीपी मेघना यादव ने बताया, ''आश्रय गृह प्रशासन का कहना है कि उसे लड़कियों के गायब होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. इन नौ लड़कियों को रेड लाइट एरिया जीबी रोड से रेसक्यू किया गया था. इसके बाद उन्हें द्वारका के आश्रय गृह में रखा गया था. इसी साल मई में उन्हें द्वारका से संस्कार आश्रम लाया गया.''
ये लड़कियां मानव तस्करी और यौन उत्पीड़न की शिकार रही हैं. पुलिस का कहना है कि इस मामले में बाहरी शख़्स और अंदर के स्टाफ़ की भूमिका की भी जाँच की जा रही है.
दो अधिकारी निलंबित
यह आश्रय गृह महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) के तहत आता है. ये विभाग उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया संभाल रहे हैं. इस घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में पत्र लिखकर उत्तर पूर्व, डब्ल्यूसीडी के ज़िला अधिकारी और संकल्प आश्रय गृह के सुपरिंटेंडेंट को निलंबित कर दिया है.
दिल्ली महिला आयोग (डीसीब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी आश्रय गृह पहुंची थीं. उन्होंने बीबीसी को बताया, ''ये नौ लड़कियां जीबी रोड से निकाली गईं है, ये मुझे पता है. इनमें से कई लड़कियां ऐसी है जिन्हें दिल्ली महिला आयोग ने रेस्क्यू किया है. आख़िर वो लड़कियां कहां गई. एक साथ इतनी लड़कियां सुरक्षा के बीच कैसे गायब हो सकती हैं.''
उन्होंने कहा, ''इस तरह के आश्रय गृहों में सरकार का दख़ल बहुत ज़रूरी है. दिल्ली महिला आयोग भी उनमें लगातार दौरा करेगा. मैं एलजी के पास भी जाऊंगी. जीबी रोड बंद होना चाहिए. ये लड़कियां जीबी रोड पहुंच गई हैं तो क्या ये सिस्टम की ग़लती नहीं है.''
Monday, November 19, 2018
दूसरे चरण का मतदान आज, इन सीटों पर रहेगी नज़र
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को 72 सीटों पर मतदान होगा. राज्य के 1.54 करोड़ मतदाता भाजपा, कांग्रेस, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ व बसपा गठबंधन समेत दूसरे दलों के 1079 उम्मीदवारों के कामकाज का फ़ैसला करेंगे.
इससे पहले इसी महीने की 12 तारीख़ को विधानसभा की 90 में से माओवाद प्रभावित 18 सीटों पर मतदान हुआ था.
मंगलवार को मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिन 19 ज़िलों में मतदान होना है, उनमें से छह ज़िले गरियाबंद, बालोद, बलरामपुर, धमतरी, कबीरधाम और महासमुंद देश के सर्वाधिक माओवाद प्रभावित ज़िलों में शामिल हैं. ऐसे में इन इलाकों में सुरक्षित और शांतिपूर्ण मतदान सुरक्षाबलों के लिये एक बड़ी चुनौती होगी.
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहु के अनुसार, "दूसरे चरण के मतदान के लिये पूरी तैयारी है. ज़िला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबलों ने पहले से ही अपनी तैयारी कर ली है और हमें उम्मीद है कि बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीक़े से मंगलवार का मतदान का कार्य संपन्न होगा."
जिन 72 सीटों पर मंगलवार को मतदान होने हैं, उनमें कई हाईप्रोफाइल सीटें भी शामिल हैं.
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल से चुनाव मैदान में हैं तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अंबिकापुर से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस छोड़ने के बाद पहली बार अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के टिकट पर जोगीलैंड कहे जाने वाले मरवाही से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी पत्नी रेणु जोगी कोटा से चुनाव मैदान में हैं तो बहू ऋचा जोगी बसपा के टिकट पर अकलतरा से पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल अपनी परंपरागत पाटन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक पिछली बार चुनाव हारने के बाद एक बार फिर बिल्हा से क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
राज्य की भाजपा सरकार के बारह में से नौ मंत्री भी चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले 28 साल से विधायक और मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं अश्लील सीडी के कारण चर्चा में रहे राजेश मूणत रायपुर पश्चिम से चुनाव मैदान में हैं. पिछले 15 साल से कई महत्वपूर्ण विभागों की ज़िम्मेदारी संभाल चुके अमर अग्रवाल बिलासपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत को कांग्रेस पार्टी ने सक्ति में अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं कलेक्टर का पद छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये ओपी चौधरी खरसिया से चुनाव लड़ रहे हैं.
इससे पहले इसी महीने की 12 तारीख़ को विधानसभा की 90 में से माओवाद प्रभावित 18 सीटों पर मतदान हुआ था.
मंगलवार को मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिन 19 ज़िलों में मतदान होना है, उनमें से छह ज़िले गरियाबंद, बालोद, बलरामपुर, धमतरी, कबीरधाम और महासमुंद देश के सर्वाधिक माओवाद प्रभावित ज़िलों में शामिल हैं. ऐसे में इन इलाकों में सुरक्षित और शांतिपूर्ण मतदान सुरक्षाबलों के लिये एक बड़ी चुनौती होगी.
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहु के अनुसार, "दूसरे चरण के मतदान के लिये पूरी तैयारी है. ज़िला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबलों ने पहले से ही अपनी तैयारी कर ली है और हमें उम्मीद है कि बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीक़े से मंगलवार का मतदान का कार्य संपन्न होगा."
जिन 72 सीटों पर मंगलवार को मतदान होने हैं, उनमें कई हाईप्रोफाइल सीटें भी शामिल हैं.
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल से चुनाव मैदान में हैं तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अंबिकापुर से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस छोड़ने के बाद पहली बार अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के टिकट पर जोगीलैंड कहे जाने वाले मरवाही से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी पत्नी रेणु जोगी कोटा से चुनाव मैदान में हैं तो बहू ऋचा जोगी बसपा के टिकट पर अकलतरा से पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल अपनी परंपरागत पाटन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक पिछली बार चुनाव हारने के बाद एक बार फिर बिल्हा से क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
राज्य की भाजपा सरकार के बारह में से नौ मंत्री भी चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले 28 साल से विधायक और मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं अश्लील सीडी के कारण चर्चा में रहे राजेश मूणत रायपुर पश्चिम से चुनाव मैदान में हैं. पिछले 15 साल से कई महत्वपूर्ण विभागों की ज़िम्मेदारी संभाल चुके अमर अग्रवाल बिलासपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत को कांग्रेस पार्टी ने सक्ति में अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं कलेक्टर का पद छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये ओपी चौधरी खरसिया से चुनाव लड़ रहे हैं.
Sunday, November 18, 2018
अमृतसर हमले से उठे 5 सवाल और उनके जवाब
ये हमला रविवार को सत्संग के दौरान हुआ. हमले के दौरान वहां सैंकड़ों लोग मौजूद थे. अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
पढ़िए इस हमले के बाद उठे पांच सवाल और उनके जबाव
अमृतसर हमले के पीछे कौन?
चश्मदीदों के मुताबिक दो नकाबपोश हमलावर मोटरसाइकिल पर आए. उनमें से एक ने निरंकारी मिशन भवन के गेट पर तैनात सेवादार पर पिस्तौल तानी और दूसरा भवन के अंदर चला गया.
भवन में साप्ताहिक सत्संग चल रहा था. हमलावर ने मंच की ओर ग्रेनेड फेंका जिसके धमाके में तीन लोग मारे गए और 19 घायल हो गए.
आपको ये भी रोचक लगेगा
गुजरात दंगे: 'बेदाग़ मोदी' बचेंगे ज़किया के 'सुप्रीम प्रहार' से?
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई
कोर्ट में मुकरने पर 'रेप पीड़िता' से वापस लिया मुआवज़ा
चश्मदीदों के मुताबिक हमलावर ने चेहरे पर नक़ाब और सिर पर कपड़ा बांधा हुआ था. वो पंजाबी भाषा बोल रहे थे.
पंजाब पुलिस के डीजीपी का कहना है कि हमले की जांच 'आतंकवादी घटना के तौर पर की जा रही है'.
पुलिस ने किसी संगठन या समूह का नाम नहीं लिया है. अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी भी नहीं ली है.
क्या पंजाब में बढ़ रही है हिंसा?
पिछले हफ़्ते ही पंजाब पुलिस ने चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 6-7 संदिग्धों के प्रदेश में दाखिल होने की अफ़वाह के बाद अलर्ट जारी किया था.
ये अलर्ट जारी किए जाने के बाद से प्रदेश भर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और हर नाके पर जांच की जा रही थी.
हाल ही में जालंधर के मकसूदां पुलिस थाने पर भी हमला हुआ था. पुलिस का कहना है कि इस हैंड ग्रेनेड हमले में चार लोग शामिल थे.
इस संबंध में पुलिस ने कुछ कश्मीरी छात्रों को हिरासत में भी लिया है.
इसके पहले पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और एक ईसाई पादरी की भी हत्या की जा चुकी है.
इन मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है. इन मामलों में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन खालिस्तान लिब्रेशन फ़ोर्स से जुड़े लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
पढ़िए इस हमले के बाद उठे पांच सवाल और उनके जबाव
अमृतसर हमले के पीछे कौन?
चश्मदीदों के मुताबिक दो नकाबपोश हमलावर मोटरसाइकिल पर आए. उनमें से एक ने निरंकारी मिशन भवन के गेट पर तैनात सेवादार पर पिस्तौल तानी और दूसरा भवन के अंदर चला गया.
भवन में साप्ताहिक सत्संग चल रहा था. हमलावर ने मंच की ओर ग्रेनेड फेंका जिसके धमाके में तीन लोग मारे गए और 19 घायल हो गए.
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चश्मदीदों के मुताबिक हमलावर ने चेहरे पर नक़ाब और सिर पर कपड़ा बांधा हुआ था. वो पंजाबी भाषा बोल रहे थे.
पंजाब पुलिस के डीजीपी का कहना है कि हमले की जांच 'आतंकवादी घटना के तौर पर की जा रही है'.
पुलिस ने किसी संगठन या समूह का नाम नहीं लिया है. अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी भी नहीं ली है.
क्या पंजाब में बढ़ रही है हिंसा?
पिछले हफ़्ते ही पंजाब पुलिस ने चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 6-7 संदिग्धों के प्रदेश में दाखिल होने की अफ़वाह के बाद अलर्ट जारी किया था.
ये अलर्ट जारी किए जाने के बाद से प्रदेश भर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और हर नाके पर जांच की जा रही थी.
हाल ही में जालंधर के मकसूदां पुलिस थाने पर भी हमला हुआ था. पुलिस का कहना है कि इस हैंड ग्रेनेड हमले में चार लोग शामिल थे.
इस संबंध में पुलिस ने कुछ कश्मीरी छात्रों को हिरासत में भी लिया है.
इसके पहले पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और एक ईसाई पादरी की भी हत्या की जा चुकी है.
इन मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है. इन मामलों में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन खालिस्तान लिब्रेशन फ़ोर्स से जुड़े लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
Friday, November 16, 2018
कालीन भैया का दबदबा, क्या चुनौती दे पाएंगे गुड्डू-बब्लू
गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी वेब सीरीज "मिर्जापुर" अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है. इसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, विक्रांत मैसी, दिव्येंदु शर्मा मुख्य भूमिका में हैं. इसे फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने प्रोड्यूस किया है. 9 सीरीज के इस वेब शो को लेकर दर्शकों में काफी एक्साइटमेंट है.
क्या है मिर्जापुर की कहानी?
मिर्जापुर एक क्राइम बेस्ड थ्रिलर वेब सीरीज है. ये यूपी में मिर्जापुर के लोकल ड्रग व्यापारी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के हुकूमत की कहानी है. कालीन भैया मिर्जापुर में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है. लोग कालीन भैया के खौफ में जी रहे हैं. कालीन भैया अपने बेटे मुन्ना (दिव्येंदु) को मिर्जापुर की जिम्मेदारी संभालने लायक बनाना चाहता है.
लेकिन दो लोकल लड़कों गुड्डू (अली फजल), बबलू (विक्रांत मैसी) के आने के बाद कालीन भैया की बादशाहत पर खतरा मंडराने लगा है. यही से शुरू होता है मिर्जापुर में पैंठ जमाने का खूनी खेल.
सोशल मीडिया पर ऑडियंस के रिव्यू आने शुरू हो गए हैं. पिछले दिनों सीरीज का ट्रेलर आया था, जिसमें कालीन भैया के रोल में दिखे पंकज त्रिपाठी की अदाकारी देखने लायक थी. ट्रेलर में अली फजल भी सरप्राइज करते हैं. विक्रांत मैसी भी अपने रोल में फिट नजर आते हैं.
देसी गैंगस्टर की कहानी
सैक्रेड गेम्स की सफलता के बाद मेकर्स अपनी कहानियों को देसी टच देने लगे हैं. देसी गैंगस्टरों की कहानी बयां करती मिर्जापुर का निर्देशन तो गुरमीत ने किया है, पर ट्रेलर में उनके काम पर अनुराग कश्यप का असर साफ़ देखा जा सकता है. बता दें कि देसी गैंगस्टर बेस्ड कहानियां डायरेक्ट करने में अनुराग लाजवाब माने जाते हैं.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आगरा के ताजमहल में प्रतिबंध लगाने के बावजूद नमाज पढ़ने के बाद तनातनी बढ़ गई है. अब इस विवाद में बजरंग दल भी कूद पड़ा है और ऐलान किया है कि वह भी ताजमहल परिसर में पूजा-पाठ करेगा.
दरअसल, ASI के बैन को ठेंगा दिखाते हुए ताजमहल इंतजामिया कमेटी (टीएमआईसी) के सदस्यों ने मंगलवार को ताजमहल परिसर में नमाज पढ़ी थी. हालांकि, 'वजू टैंक' (जहां नमाज पढ़ने से पहले नमाजी अपना शरीर साफ करते हैं) में रोज की तरह ताला ही लगा रहा और नमाजियों ने नमाज पढ़ने से पहले पीने के पानी से खुद को साफ किया. इस दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारीयों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने. ताजमहल के अंदर नमाज पढ़ने का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है.
क्या है मिर्जापुर की कहानी?
मिर्जापुर एक क्राइम बेस्ड थ्रिलर वेब सीरीज है. ये यूपी में मिर्जापुर के लोकल ड्रग व्यापारी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के हुकूमत की कहानी है. कालीन भैया मिर्जापुर में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है. लोग कालीन भैया के खौफ में जी रहे हैं. कालीन भैया अपने बेटे मुन्ना (दिव्येंदु) को मिर्जापुर की जिम्मेदारी संभालने लायक बनाना चाहता है.
लेकिन दो लोकल लड़कों गुड्डू (अली फजल), बबलू (विक्रांत मैसी) के आने के बाद कालीन भैया की बादशाहत पर खतरा मंडराने लगा है. यही से शुरू होता है मिर्जापुर में पैंठ जमाने का खूनी खेल.
सोशल मीडिया पर ऑडियंस के रिव्यू आने शुरू हो गए हैं. पिछले दिनों सीरीज का ट्रेलर आया था, जिसमें कालीन भैया के रोल में दिखे पंकज त्रिपाठी की अदाकारी देखने लायक थी. ट्रेलर में अली फजल भी सरप्राइज करते हैं. विक्रांत मैसी भी अपने रोल में फिट नजर आते हैं.
देसी गैंगस्टर की कहानी
सैक्रेड गेम्स की सफलता के बाद मेकर्स अपनी कहानियों को देसी टच देने लगे हैं. देसी गैंगस्टरों की कहानी बयां करती मिर्जापुर का निर्देशन तो गुरमीत ने किया है, पर ट्रेलर में उनके काम पर अनुराग कश्यप का असर साफ़ देखा जा सकता है. बता दें कि देसी गैंगस्टर बेस्ड कहानियां डायरेक्ट करने में अनुराग लाजवाब माने जाते हैं.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आगरा के ताजमहल में प्रतिबंध लगाने के बावजूद नमाज पढ़ने के बाद तनातनी बढ़ गई है. अब इस विवाद में बजरंग दल भी कूद पड़ा है और ऐलान किया है कि वह भी ताजमहल परिसर में पूजा-पाठ करेगा.
दरअसल, ASI के बैन को ठेंगा दिखाते हुए ताजमहल इंतजामिया कमेटी (टीएमआईसी) के सदस्यों ने मंगलवार को ताजमहल परिसर में नमाज पढ़ी थी. हालांकि, 'वजू टैंक' (जहां नमाज पढ़ने से पहले नमाजी अपना शरीर साफ करते हैं) में रोज की तरह ताला ही लगा रहा और नमाजियों ने नमाज पढ़ने से पहले पीने के पानी से खुद को साफ किया. इस दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारीयों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने. ताजमहल के अंदर नमाज पढ़ने का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है.
Tuesday, November 6, 2018
RBI से उसके रिजर्व का एक-तिहाई चाहती है मोदी सरकार
रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के बीच खींचतान जारी है. जहां केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.
गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.
RBI से उलझी मोदी सरकार को IMF ने दी पीछे हटने की सलाह
वहीं, केन्द्र सरकार की इस मांग पर रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. इस दलील के साथ केन्द्रीय रिजर्व बैंक केन्द्र सरकार को अपने रिजर्व खजाने से पैसे देने के का विरोध कर रहा है.
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि केन्द्र सरकार का पक्ष है कि रिजर्व फंड से 3.6 ट्रिलियन रुपये को बाजार में लाकर सरकारी बैंकों की मदद की जा सकती है. गौरतलब है कि इस पैसे से सरकारी बैंक नए कारोबारी कर्ज बांट सकेंगे और अपनी कमाई मजबूत कर सकेंगे. केन्द्र सरकार यह भी कह रही है कि एक तरफ जहां सरकारी बैंक अपने डूबे कर्ज की रिकवरी कर रही है, रिजर्व मुद्रा की मदद से वह वापस मजबूती के साथ खड़ा हो सकता है.
RBI और सरकार के बीच और बढ़ी तकरार, इस्तीफा दे सकते हैं उर्जित पटेल
वहीं इसके उलट रिजर्व बैंक का मानना है कि रिजर्व मुद्रा को खर्च करना उचित नहीं है. इस खर्च से कमाई में इजाफा नहीं होगा और यह खर्च महज सरकारी खर्च बनकर रह जाएगा. वहीं आरबीआई के मुताबिक वित्तीय बाजार के लिए भी यह कदम उचित नहीं है क्योंकि इससे बाजार का भरोसा कम होने का खतरा है.
गौरतलब है कि इससे पहले 2017-18 में रिजर्व बैंक ने 50,000 करोड़ रुपये की रकम अपने रिजर्व से केन्द्र सरकार को दी थी. इसमें 10,000 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी शामिल है. वहीं इससे पहले 2016-17 में उसने 30,659 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को दी थी.
इमरान आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए आर्थिक पैकेज सुनिश्चित करने के इरादे से चीन की आधिकारिक यात्रा पर गए थे.
‘पीटीवी न्यूज’ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया, ‘चीन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री के संबोधन के आज सीधे प्रसारण के दौरान वर्तनी से संबंधित गलती हुई. यह गलती करीब 20 सेकंड तक बनी रही, जिसे बाद में हटा लिया गया. इस घटना पर हमें खेद है. संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.’
स्थानीय मीडिया के अनुसार यह चूक इसलिए भी खासतौर पर मजाक का पात्र बन गयी क्योंकि खान आसन्न आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को इस संकट से उबारने की अपनी कोशिश के तहत चीन की यात्रा कर रहे हैं.
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने ‘पीटीवी’ द्वारा दिखाये गये डेटलाइन स्लग (जगह का नाम) को लेकर हुई व्यापक आलोचना के संदर्भ में जांच के आदेश दिये हैं.
पीटीवी की इस चूक की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई. पाकिस्तान में ट्विटर पर #बेगिंग के साथ पोस्ट किये गये इसके स्क्रीनशॉट ट्रेंड कर रहे थे.
अपनी यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग से खान की बातचीत का मुख्य फोकस आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिये चीन से कर्ज मांगना था.
बहरहाल चीन ने कहा कि वह पाकिस्तान को आवश्यक सहयोग करेगा. ऐसी सूचना है कि चीन ने पाकिस्तान को छह अरब डॉलर की सहायता राशि देने की प्रतिबद्धता जतायी है, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.
गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.
RBI से उलझी मोदी सरकार को IMF ने दी पीछे हटने की सलाह
वहीं, केन्द्र सरकार की इस मांग पर रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. इस दलील के साथ केन्द्रीय रिजर्व बैंक केन्द्र सरकार को अपने रिजर्व खजाने से पैसे देने के का विरोध कर रहा है.
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि केन्द्र सरकार का पक्ष है कि रिजर्व फंड से 3.6 ट्रिलियन रुपये को बाजार में लाकर सरकारी बैंकों की मदद की जा सकती है. गौरतलब है कि इस पैसे से सरकारी बैंक नए कारोबारी कर्ज बांट सकेंगे और अपनी कमाई मजबूत कर सकेंगे. केन्द्र सरकार यह भी कह रही है कि एक तरफ जहां सरकारी बैंक अपने डूबे कर्ज की रिकवरी कर रही है, रिजर्व मुद्रा की मदद से वह वापस मजबूती के साथ खड़ा हो सकता है.
RBI और सरकार के बीच और बढ़ी तकरार, इस्तीफा दे सकते हैं उर्जित पटेल
वहीं इसके उलट रिजर्व बैंक का मानना है कि रिजर्व मुद्रा को खर्च करना उचित नहीं है. इस खर्च से कमाई में इजाफा नहीं होगा और यह खर्च महज सरकारी खर्च बनकर रह जाएगा. वहीं आरबीआई के मुताबिक वित्तीय बाजार के लिए भी यह कदम उचित नहीं है क्योंकि इससे बाजार का भरोसा कम होने का खतरा है.
गौरतलब है कि इससे पहले 2017-18 में रिजर्व बैंक ने 50,000 करोड़ रुपये की रकम अपने रिजर्व से केन्द्र सरकार को दी थी. इसमें 10,000 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी शामिल है. वहीं इससे पहले 2016-17 में उसने 30,659 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को दी थी.
इमरान आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए आर्थिक पैकेज सुनिश्चित करने के इरादे से चीन की आधिकारिक यात्रा पर गए थे.
‘पीटीवी न्यूज’ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया, ‘चीन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री के संबोधन के आज सीधे प्रसारण के दौरान वर्तनी से संबंधित गलती हुई. यह गलती करीब 20 सेकंड तक बनी रही, जिसे बाद में हटा लिया गया. इस घटना पर हमें खेद है. संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.’
स्थानीय मीडिया के अनुसार यह चूक इसलिए भी खासतौर पर मजाक का पात्र बन गयी क्योंकि खान आसन्न आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को इस संकट से उबारने की अपनी कोशिश के तहत चीन की यात्रा कर रहे हैं.
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने ‘पीटीवी’ द्वारा दिखाये गये डेटलाइन स्लग (जगह का नाम) को लेकर हुई व्यापक आलोचना के संदर्भ में जांच के आदेश दिये हैं.
पीटीवी की इस चूक की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई. पाकिस्तान में ट्विटर पर #बेगिंग के साथ पोस्ट किये गये इसके स्क्रीनशॉट ट्रेंड कर रहे थे.
अपनी यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग से खान की बातचीत का मुख्य फोकस आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिये चीन से कर्ज मांगना था.
बहरहाल चीन ने कहा कि वह पाकिस्तान को आवश्यक सहयोग करेगा. ऐसी सूचना है कि चीन ने पाकिस्तान को छह अरब डॉलर की सहायता राशि देने की प्रतिबद्धता जतायी है, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
Sunday, November 4, 2018
रामचंद्र गुहा प्रकरण पर ब्लॉग: पढ़ने-लिखने से ज़्यादा ज़रूरी 'हिंदूवादी देशभक्ति' है
देशद्रोहियों' की लंबी होती सूची में एक और नाम जुड़ गया है इतिहासकार रामचंद्र गुहा का. गुहा अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर नहीं होंगे क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नज़रों में वे 'शिक्षा और देश के लिए नुकसानदेह हैं.
रामचंद्र गुहा के बारे में बात करने से पहले ज़रा पीछे चलें तो इस ट्रेंड को समझने में आसानी होगी.
27 सितंबर 2018- मध्य प्रदेश में मंदसौर के एक सरकारी कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ने क्लासरूम में नारेबाज़ी कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों से पैर छूकर माफ़ी मांगी थी.
यह वीडियो एक दिन के लिए वायरल हुआ उसके बाद लोग उसे भूल गए, 'देशद्रोही' घोषित किए गए प्रोफ़ेसर साहब ने गांधीवादी तरीक़े से अपना विरोध प्रकट किया था, और समझदारी भी इसी में थी.
उसी राज्य में उज्जैन में 2006 में माधव कॉलेज के प्रोफ़ेसर सभरवाल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उन्हें पीटने का आरोप जिन छह लोगों पर लगा था वे भी एबीवीपी के 'देशभक्त छात्र नेता' थे.
प्रोफ़ेसर सभरवाल हत्याकांड के एक प्रमुख अभियुक्त की तबीयत का हाल पूछने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2008 में अस्पताल गए थे जब हत्या के मुक़दमे की सुनवाई जारी थी. ज़ाहिर है, आलोचना हुई कि मुख्यमंत्री हिंसक प्रवृति वाले लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं. लेकिन यह बात भी आई-गई हो गई.
राज्य सरकार ने प्रोफ़ेसर सभरवाल की हत्या के मामले में जो रवैया अपनाया उस पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया. बहरहाल, 2009 में सभी छह अभियुक्त 'सबूतों के अभाव में' बरी हो गए, इन सभी का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन एबीवीपी और संघ परिवार की बजरंग दल जैसी संस्थाओं से था. बरी होने के बाद कुछ लोगों को शिक्षण संस्थानों में नौकरियां भी दी गईं.
कैम्पस है नियंत्रण की पहली सीढ़ी
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश से 10-12 साल पहले एक तरह का ट्रेंड शुरू हुआ. मंदसौर और उज्जैन जैसी कई घटनाएं वहां हुईं, लेकिन 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार के आने के बाद, एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने देश भर के कैम्पसों में ख़ुद को 'देशभक्त' और बाक़ी सभी को 'देशद्रोही' घोषित करने का अभियान छेड़ दिया.
दिल्ली के रामजस कॉलेज और जेएनयू से लेकर, इलाहाबाद और हैदराबाद तक सभी घटनाएं एक जैसी हैं और उन्हें अलग-अलग वाकयों की तरह नहीं बल्कि एक ट्रेंड की तरह देखा और समझा जाना चाहिए.
आरएसएस के निर्देशों के तहत, एबीवीपी या दूसरे हिंदुत्ववादी संगठन जो कुछ कर रहे हैं उसके पीछे सरकार पूरी ताक़त के साथ खड़ी है.
शिक्षण संस्थानों का हिंदूकरण देश के सभी संस्थानों पर आरएसएस के नियंत्रण की पहली सीढ़ी है और इस प्रोजेक्ट पर काफ़ी गंभीरता से काम जारी है. पूरी कोशिश है कि किसी भी कैम्पस में हिंदुत्व के अलावा, किसी और तरह की आवाज़ न सुनाई दे. मसलन, दो साल पहले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पुलिस के घेरे में वापस लौटना पड़ा क्योंकि एबीवीपी उन्हें 'देशद्रोही' घोषित कर चुकी थी.
छोटे-बड़े हर तरह के 'देशद्रोही'
'गांधी बिफ़ोर इंडिया' और 'इंडिया आफ़्टर गांधी' जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किताबें लिखने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा, गांधी के राज्य गुजरात में 'राष्ट्रविरोधी' घोषित कर दिए गए हैं. एबीवीपी के छात्रों ने तय किया कि अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में उनका पढ़ाना 'शिक्षा और राष्ट्र दोनों के लिए' नुकसानदेह होगा.
आम तौर पर देशद्रोही का लेबल चिपका देना ही काफ़ी होता है, लेकिन इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक लंबी चिट्ठी लिखी गई जिसमें साबित करने की कोशिश की गई कि रामचंद्र गुहा सचमुच राष्ट्रविरोधी हैं. उस चिट्ठी में गुहा की किताबों के अंशों का हवाला दिया गया, यह तार्किक तरीक़े से अपनी बात रखने की शायद एबीवीपी की पहली कोशिश थी.
लेकिन काश वे जानते कि लिखित शब्दों के साथ " " का क्या मतलब होता है. गुहा के ख़िलाफ़ जो चार सबूत पेश किए गए हैं, उनमें से दो उन्होंने नहीं लिखे हैं बल्कि वे ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन के नेता ईवी रामास्वामी 'पेरियार' के लेखन और भाषण के अंश हैं जिनका गुहा ने अपनी किताब में " " के साथ हवाला दिया है.
रामचंद्र गुहा के बारे में बात करने से पहले ज़रा पीछे चलें तो इस ट्रेंड को समझने में आसानी होगी.
27 सितंबर 2018- मध्य प्रदेश में मंदसौर के एक सरकारी कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ने क्लासरूम में नारेबाज़ी कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों से पैर छूकर माफ़ी मांगी थी.
यह वीडियो एक दिन के लिए वायरल हुआ उसके बाद लोग उसे भूल गए, 'देशद्रोही' घोषित किए गए प्रोफ़ेसर साहब ने गांधीवादी तरीक़े से अपना विरोध प्रकट किया था, और समझदारी भी इसी में थी.
उसी राज्य में उज्जैन में 2006 में माधव कॉलेज के प्रोफ़ेसर सभरवाल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उन्हें पीटने का आरोप जिन छह लोगों पर लगा था वे भी एबीवीपी के 'देशभक्त छात्र नेता' थे.
प्रोफ़ेसर सभरवाल हत्याकांड के एक प्रमुख अभियुक्त की तबीयत का हाल पूछने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2008 में अस्पताल गए थे जब हत्या के मुक़दमे की सुनवाई जारी थी. ज़ाहिर है, आलोचना हुई कि मुख्यमंत्री हिंसक प्रवृति वाले लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं. लेकिन यह बात भी आई-गई हो गई.
राज्य सरकार ने प्रोफ़ेसर सभरवाल की हत्या के मामले में जो रवैया अपनाया उस पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया. बहरहाल, 2009 में सभी छह अभियुक्त 'सबूतों के अभाव में' बरी हो गए, इन सभी का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन एबीवीपी और संघ परिवार की बजरंग दल जैसी संस्थाओं से था. बरी होने के बाद कुछ लोगों को शिक्षण संस्थानों में नौकरियां भी दी गईं.
कैम्पस है नियंत्रण की पहली सीढ़ी
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश से 10-12 साल पहले एक तरह का ट्रेंड शुरू हुआ. मंदसौर और उज्जैन जैसी कई घटनाएं वहां हुईं, लेकिन 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार के आने के बाद, एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने देश भर के कैम्पसों में ख़ुद को 'देशभक्त' और बाक़ी सभी को 'देशद्रोही' घोषित करने का अभियान छेड़ दिया.
दिल्ली के रामजस कॉलेज और जेएनयू से लेकर, इलाहाबाद और हैदराबाद तक सभी घटनाएं एक जैसी हैं और उन्हें अलग-अलग वाकयों की तरह नहीं बल्कि एक ट्रेंड की तरह देखा और समझा जाना चाहिए.
आरएसएस के निर्देशों के तहत, एबीवीपी या दूसरे हिंदुत्ववादी संगठन जो कुछ कर रहे हैं उसके पीछे सरकार पूरी ताक़त के साथ खड़ी है.
शिक्षण संस्थानों का हिंदूकरण देश के सभी संस्थानों पर आरएसएस के नियंत्रण की पहली सीढ़ी है और इस प्रोजेक्ट पर काफ़ी गंभीरता से काम जारी है. पूरी कोशिश है कि किसी भी कैम्पस में हिंदुत्व के अलावा, किसी और तरह की आवाज़ न सुनाई दे. मसलन, दो साल पहले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पुलिस के घेरे में वापस लौटना पड़ा क्योंकि एबीवीपी उन्हें 'देशद्रोही' घोषित कर चुकी थी.
छोटे-बड़े हर तरह के 'देशद्रोही'
'गांधी बिफ़ोर इंडिया' और 'इंडिया आफ़्टर गांधी' जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किताबें लिखने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा, गांधी के राज्य गुजरात में 'राष्ट्रविरोधी' घोषित कर दिए गए हैं. एबीवीपी के छात्रों ने तय किया कि अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में उनका पढ़ाना 'शिक्षा और राष्ट्र दोनों के लिए' नुकसानदेह होगा.
आम तौर पर देशद्रोही का लेबल चिपका देना ही काफ़ी होता है, लेकिन इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक लंबी चिट्ठी लिखी गई जिसमें साबित करने की कोशिश की गई कि रामचंद्र गुहा सचमुच राष्ट्रविरोधी हैं. उस चिट्ठी में गुहा की किताबों के अंशों का हवाला दिया गया, यह तार्किक तरीक़े से अपनी बात रखने की शायद एबीवीपी की पहली कोशिश थी.
लेकिन काश वे जानते कि लिखित शब्दों के साथ " " का क्या मतलब होता है. गुहा के ख़िलाफ़ जो चार सबूत पेश किए गए हैं, उनमें से दो उन्होंने नहीं लिखे हैं बल्कि वे ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन के नेता ईवी रामास्वामी 'पेरियार' के लेखन और भाषण के अंश हैं जिनका गुहा ने अपनी किताब में " " के साथ हवाला दिया है.
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