Monday, November 19, 2018

दूसरे चरण का मतदान आज, इन सीटों पर रहेगी नज़र

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को 72 सीटों पर मतदान होगा. राज्य के 1.54 करोड़ मतदाता भाजपा, कांग्रेस, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ व बसपा गठबंधन समेत दूसरे दलों के 1079 उम्मीदवारों के कामकाज का फ़ैसला करेंगे.

इससे पहले इसी महीने की 12 तारीख़ को विधानसभा की 90 में से माओवाद प्रभावित 18 सीटों पर मतदान हुआ था.

मंगलवार को मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिन 19 ज़िलों में मतदान होना है, उनमें से छह ज़िले गरियाबंद, बालोद, बलरामपुर, धमतरी, कबीरधाम और महासमुंद देश के सर्वाधिक माओवाद प्रभावित ज़िलों में शामिल हैं. ऐसे में इन इलाकों में सुरक्षित और शांतिपूर्ण मतदान सुरक्षाबलों के लिये एक बड़ी चुनौती होगी.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहु के अनुसार, "दूसरे चरण के मतदान के लिये पूरी तैयारी है. ज़िला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबलों ने पहले से ही अपनी तैयारी कर ली है और हमें उम्मीद है कि बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीक़े से मंगलवार का मतदान का कार्य संपन्न होगा."

जिन 72 सीटों पर मंगलवार को मतदान होने हैं, उनमें कई हाईप्रोफाइल सीटें भी शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल से चुनाव मैदान में हैं तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अंबिकापुर से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस छोड़ने के बाद पहली बार अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के टिकट पर जोगीलैंड कहे जाने वाले मरवाही से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी पत्नी रेणु जोगी कोटा से चुनाव मैदान में हैं तो बहू ऋचा जोगी बसपा के टिकट पर अकलतरा से पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल अपनी परंपरागत पाटन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक पिछली बार चुनाव हारने के बाद एक बार फिर बिल्हा से क़िस्मत आज़मा रहे हैं.

राज्य की भाजपा सरकार के बारह में से नौ मंत्री भी चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले 28 साल से विधायक और मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं अश्लील सीडी के कारण चर्चा में रहे राजेश मूणत रायपुर पश्चिम से चुनाव मैदान में हैं. पिछले 15 साल से कई महत्वपूर्ण विभागों की ज़िम्मेदारी संभाल चुके अमर अग्रवाल बिलासपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत को कांग्रेस पार्टी ने सक्ति में अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं कलेक्टर का पद छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये ओपी चौधरी खरसिया से चुनाव लड़ रहे हैं.

Sunday, November 18, 2018

अमृतसर हमले से उठे 5 सवाल और उनके जवाब

ये हमला रविवार को सत्संग के दौरान हुआ. हमले के दौरान वहां सैंकड़ों लोग मौजूद थे. अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.

पढ़िए इस हमले के बाद उठे पांच सवाल और उनके जबाव

अमृतसर हमले के पीछे कौन?
चश्मदीदों के मुताबिक दो नकाबपोश हमलावर मोटरसाइकिल पर आए. उनमें से एक ने निरंकारी मिशन भवन के गेट पर तैनात सेवादार पर पिस्तौल तानी और दूसरा भवन के अंदर चला गया.

भवन में साप्ताहिक सत्संग चल रहा था. हमलावर ने मंच की ओर ग्रेनेड फेंका जिसके धमाके में तीन लोग मारे गए और 19 घायल हो गए.

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चश्मदीदों के मुताबिक हमलावर ने चेहरे पर नक़ाब और सिर पर कपड़ा बांधा हुआ था. वो पंजाबी भाषा बोल रहे थे.

पंजाब पुलिस के डीजीपी का कहना है कि हमले की जांच 'आतंकवादी घटना के तौर पर की जा रही है'.

पुलिस ने किसी संगठन या समूह का नाम नहीं लिया है. अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी भी नहीं ली है.

क्या पंजाब में बढ़ रही है हिंसा?
पिछले हफ़्ते ही पंजाब पुलिस ने चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 6-7 संदिग्धों के प्रदेश में दाखिल होने की अफ़वाह के बाद अलर्ट जारी किया था.

ये अलर्ट जारी किए जाने के बाद से प्रदेश भर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और हर नाके पर जांच की जा रही थी.

हाल ही में जालंधर के मकसूदां पुलिस थाने पर भी हमला हुआ था. पुलिस का कहना है कि इस हैंड ग्रेनेड हमले में चार लोग शामिल थे.

इस संबंध में पुलिस ने कुछ कश्मीरी छात्रों को हिरासत में भी लिया है.

इसके पहले पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और एक ईसाई पादरी की भी हत्या की जा चुकी है.

इन मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है. इन मामलों में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन खालिस्तान लिब्रेशन फ़ोर्स से जुड़े लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

Friday, November 16, 2018

कालीन भैया का दबदबा, क्या चुनौती दे पाएंगे गुड्डू-बब्लू

गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी वेब सीरीज "मिर्जापुर" अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है. इसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, विक्रांत मैसी, दिव्येंदु शर्मा मुख्य भूमिका में हैं. इसे फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने प्रोड्यूस किया है. 9 सीरीज के इस वेब शो को लेकर दर्शकों में काफी एक्साइटमेंट है.

क्या है मिर्जापुर की कहानी?

मिर्जापुर एक क्राइम बेस्ड थ्रिलर वेब सीरीज है. ये यूपी में मिर्जापुर के लोकल ड्रग व्यापारी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के हुकूमत की कहानी है. कालीन भैया मिर्जापुर में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है. लोग कालीन भैया के खौफ में जी रहे हैं. कालीन भैया अपने बेटे मुन्ना (दिव्येंदु) को मिर्जापुर की जिम्मेदारी संभालने लायक बनाना चाहता है.


लेकिन दो लोकल लड़कों गुड्डू (अली फजल), बबलू (विक्रांत मैसी) के आने के बाद कालीन भैया की बादशाहत पर खतरा मंडराने लगा है. यही से शुरू होता है मिर्जापुर में पैंठ जमाने का खूनी खेल.

सोशल मीडिया पर ऑडियंस के रिव्यू आने शुरू हो गए हैं. पिछले दिनों सीरीज का ट्रेलर आया था, जिसमें कालीन भैया के रोल में दिखे पंकज त्रिपाठी की अदाकारी देखने लायक थी. ट्रेलर में अली फजल भी सरप्राइज करते हैं. विक्रांत मैसी भी अपने रोल में फिट नजर आते हैं.

देसी गैंगस्टर की कहानी

सैक्रेड गेम्स की सफलता के बाद मेकर्स अपनी कहानियों को देसी टच देने लगे हैं. देसी गैंगस्टरों की कहानी बयां करती मिर्जापुर का निर्देशन तो गुरमीत ने किया है, पर ट्रेलर में उनके काम पर अनुराग कश्यप का असर साफ़ देखा जा सकता है. बता दें कि देसी गैंगस्टर बेस्ड कहानियां डायरेक्ट करने में अनुराग लाजवाब माने जाते हैं.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आगरा के ताजमहल में प्रतिबंध लगाने के बावजूद नमाज पढ़ने के बाद तनातनी बढ़ गई है. अब इस विवाद में बजरंग दल भी कूद पड़ा है और ऐलान किया है कि वह भी ताजमहल परिसर में पूजा-पाठ करेगा.

दरअसल, ASI के बैन को ठेंगा दिखाते हुए ताजमहल इंतजामिया कमेटी (टीएमआईसी) के सदस्यों ने मंगलवार को ताजमहल परिसर में नमाज पढ़ी थी. हालांकि, 'वजू टैंक' (जहां नमाज पढ़ने से पहले नमाजी अपना शरीर साफ करते हैं) में रोज की तरह ताला ही लगा रहा और नमाजियों ने नमाज पढ़ने से पहले पीने के पानी से खुद को साफ किया. इस दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारीयों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने. ताजमहल के अंदर नमाज पढ़ने का वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है.

Tuesday, November 6, 2018

RBI से उसके रिजर्व का एक-तिहाई चाहती है मोदी सरकार

रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के बीच खींचतान जारी है. जहां केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.

गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

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वहीं, केन्द्र सरकार की इस मांग पर रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. इस दलील के साथ केन्द्रीय रिजर्व बैंक केन्द्र सरकार को अपने रिजर्व खजाने से पैसे देने के का विरोध कर रहा है.

सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि केन्द्र सरकार का पक्ष है कि रिजर्व फंड से 3.6 ट्रिलियन रुपये को बाजार में लाकर सरकारी बैंकों की मदद की जा सकती है. गौरतलब है कि इस पैसे से सरकारी बैंक नए कारोबारी कर्ज बांट सकेंगे और अपनी कमाई मजबूत कर सकेंगे. केन्द्र सरकार यह भी कह रही है कि एक तरफ जहां सरकारी बैंक अपने डूबे कर्ज की रिकवरी कर रही है, रिजर्व मुद्रा की मदद से वह वापस मजबूती के साथ खड़ा हो सकता है.

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वहीं इसके उलट रिजर्व बैंक का मानना है कि रिजर्व मुद्रा को खर्च करना उचित नहीं है. इस खर्च से कमाई में इजाफा नहीं होगा और यह खर्च महज सरकारी खर्च बनकर रह जाएगा. वहीं आरबीआई के मुताबिक वित्तीय बाजार के लिए भी यह कदम उचित नहीं है क्योंकि इससे बाजार का भरोसा कम होने का खतरा है.

गौरतलब है कि इससे पहले 2017-18 में रिजर्व बैंक ने 50,000 करोड़ रुपये की रकम अपने रिजर्व से केन्द्र सरकार को दी थी. इसमें 10,000 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी शामिल है. वहीं इससे पहले 2016-17 में उसने 30,659 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को दी थी.

इमरान आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए आर्थिक पैकेज सुनिश्चित करने के इरादे से चीन की आधिकारिक यात्रा पर गए थे.
‘पीटीवी न्यूज’ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया, ‘चीन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री के संबोधन के आज सीधे प्रसारण के दौरान वर्तनी से संबंधित गलती हुई. यह गलती करीब 20 सेकंड तक बनी रही, जिसे बाद में हटा लिया गया. इस घटना पर हमें खेद है. संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.’

स्थानीय मीडिया के अनुसार यह चूक इसलिए भी खासतौर पर मजाक का पात्र बन गयी क्योंकि खान आसन्न आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को इस संकट से उबारने की अपनी कोशिश के तहत चीन की यात्रा कर रहे हैं.

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने ‘पीटीवी’ द्वारा दिखाये गये डेटलाइन स्लग (जगह का नाम) को लेकर हुई व्यापक आलोचना के संदर्भ में जांच के आदेश दिये हैं.

पीटीवी की इस चूक की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई. पाकिस्तान में ट्विटर पर #बेगिंग के साथ पोस्ट किये गये इसके स्क्रीनशॉट ट्रेंड कर रहे थे.

अपनी यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग से खान की बातचीत का मुख्य फोकस आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिये चीन से कर्ज मांगना था.

बहरहाल चीन ने कहा कि वह पाकिस्तान को आवश्यक सहयोग करेगा. ऐसी सूचना है कि चीन ने पाकिस्तान को छह अरब डॉलर की सहायता राशि देने की प्रतिबद्धता जतायी है, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

Sunday, November 4, 2018

रामचंद्र गुहा प्रकरण पर ब्लॉग: पढ़ने-लिखने से ज़्यादा ज़रूरी 'हिंदूवादी देशभक्ति' है

देशद्रोहियों' की लंबी होती सूची में एक और नाम जुड़ गया है इतिहासकार रामचंद्र गुहा का. गुहा अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर नहीं होंगे क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नज़रों में वे 'शिक्षा और देश के लिए नुकसानदेह हैं.

रामचंद्र गुहा के बारे में बात करने से पहले ज़रा पीछे चलें तो इस ट्रेंड को समझने में आसानी होगी.

27 सितंबर 2018- मध्य प्रदेश में मंदसौर के एक सरकारी कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ने क्लासरूम में नारेबाज़ी कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों से पैर छूकर माफ़ी मांगी थी.

यह वीडियो एक दिन के लिए वायरल हुआ उसके बाद लोग उसे भूल गए, 'देशद्रोही' घोषित किए गए प्रोफ़ेसर साहब ने गांधीवादी तरीक़े से अपना विरोध प्रकट किया था, और समझदारी भी इसी में थी.

उसी राज्य में उज्जैन में 2006 में माधव कॉलेज के प्रोफ़ेसर सभरवाल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उन्हें पीटने का आरोप जिन छह लोगों पर लगा था वे भी एबीवीपी के 'देशभक्त छात्र नेता' थे.

प्रोफ़ेसर सभरवाल हत्याकांड के एक प्रमुख अभियुक्त की तबीयत का हाल पूछने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2008 में अस्पताल गए थे जब हत्या के मुक़दमे की सुनवाई जारी थी. ज़ाहिर है, आलोचना हुई कि मुख्यमंत्री हिंसक प्रवृति वाले लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं. लेकिन यह बात भी आई-गई हो गई.

राज्य सरकार ने प्रोफ़ेसर सभरवाल की हत्या के मामले में जो रवैया अपनाया उस पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया. बहरहाल, 2009 में सभी छह अभियुक्त 'सबूतों के अभाव में' बरी हो गए, इन सभी का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन एबीवीपी और संघ परिवार की बजरंग दल जैसी संस्थाओं से था. बरी होने के बाद कुछ लोगों को शिक्षण संस्थानों में नौकरियां भी दी गईं.

कैम्पस है नियंत्रण की पहली सीढ़ी
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश से 10-12 साल पहले एक तरह का ट्रेंड शुरू हुआ. मंदसौर और उज्जैन जैसी कई घटनाएं वहां हुईं, लेकिन 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार के आने के बाद, एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने देश भर के कैम्पसों में ख़ुद को 'देशभक्त' और बाक़ी सभी को 'देशद्रोही' घोषित करने का अभियान छेड़ दिया.

दिल्ली के रामजस कॉलेज और जेएनयू से लेकर, इलाहाबाद और हैदराबाद तक सभी घटनाएं एक जैसी हैं और उन्हें अलग-अलग वाकयों की तरह नहीं बल्कि एक ट्रेंड की तरह देखा और समझा जाना चाहिए.

आरएसएस के निर्देशों के तहत, एबीवीपी या दूसरे हिंदुत्ववादी संगठन जो कुछ कर रहे हैं उसके पीछे सरकार पूरी ताक़त के साथ खड़ी है.

शिक्षण संस्थानों का हिंदूकरण देश के सभी संस्थानों पर आरएसएस के नियंत्रण की पहली सीढ़ी है और इस प्रोजेक्ट पर काफ़ी गंभीरता से काम जारी है. पूरी कोशिश है कि किसी भी कैम्पस में हिंदुत्व के अलावा, किसी और तरह की आवाज़ न सुनाई दे. मसलन, दो साल पहले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पुलिस के घेरे में वापस लौटना पड़ा क्योंकि एबीवीपी उन्हें 'देशद्रोही' घोषित कर चुकी थी.

छोटे-बड़े हर तरह के 'देशद्रोही'
'गांधी बिफ़ोर इंडिया' और 'इंडिया आफ़्टर गांधी' जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किताबें लिखने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा, गांधी के राज्य गुजरात में 'राष्ट्रविरोधी' घोषित कर दिए गए हैं. एबीवीपी के छात्रों ने तय किया कि अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में उनका पढ़ाना 'शिक्षा और राष्ट्र दोनों के लिए' नुकसानदेह होगा.

आम तौर पर देशद्रोही का लेबल चिपका देना ही काफ़ी होता है, लेकिन इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक लंबी चिट्ठी लिखी गई जिसमें साबित करने की कोशिश की गई कि रामचंद्र गुहा सचमुच राष्ट्रविरोधी हैं. उस चिट्ठी में गुहा की किताबों के अंशों का हवाला दिया गया, यह तार्किक तरीक़े से अपनी बात रखने की शायद एबीवीपी की पहली कोशिश थी.

लेकिन काश वे जानते कि लिखित शब्दों के साथ " " का क्या मतलब होता है. गुहा के ख़िलाफ़ जो चार सबूत पेश किए गए हैं, उनमें से दो उन्होंने नहीं लिखे हैं बल्कि वे ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन के नेता ईवी रामास्वामी 'पेरियार' के लेखन और भाषण के अंश हैं जिनका गुहा ने अपनी किताब में " " के साथ हवाला दिया है.