Sunday, February 24, 2019

新一轮中美贸易谈判 协议谈成了吗?

中美贸易谈判90天限期将近,中方代表团本周到访华盛顿,协议达成了吗?

“谈判进展顺利,但我们要走着看。”美国总统特朗普会见中国国家副总理刘鹤带领的中方谈判团队后,在椭圆办公室对记者表示。

按原计划,如果两国在3月1日前未能达成协议,美国对2000亿中国商品的关税将从10%升至25%,但特朗普已多次表达延期的意愿。

“如果有切实的进展,延长限期并无不妥,”特朗普边说边以手势示意刘鹤将这一信息传达回中南海。

谈判限期或延至3月习特会后

特朗普透露,他与习近平可能在3月再次会谈,地点或定在他位于佛罗里达州的住宅海湖庄园,届时敲定中美谈判团队还未谈妥的问题。“我与习近平主席会谈妥最终议题。可能会,可能不会。”

由以上迹象可见,中美贸易谈判限期可能延长至两国元首会谈后。

“元首会谈不容易排期,因此谈判限期有一定的不确定性。”智库美国企业研究院(AEI)学者史剑道(Derek Scissors)对BBC中文表示。

虽然中美贸易谈判很可能延期,但对于商界来说,不确定性依然没有解除,可能生效的高关税依然犹如悬在头上的一把刀。

“延期对我们来说没有意义” 美国服装鞋类协会(American Apparel & Footwear Association)总裁海芬斌(Rick Helfenbein)对BBC中文表示。他说,在2月初举行的国际展销会上,美国进口商下订单更为谨慎,成交量比往年萧条。许多服装鞋类品牌与零售商巨头,都已经开始有意地减少从中国进口,将眼光放向东南亚制造商。

该行业进口商一般在零售期前4到9个月向制造商下订单,他们对未来的不确定性尤其敏感。“关税的威胁是美国进口商的首要担忧,其次才是知识产权问题。”海芬斌说。

货币汇率协议与华为案
白宫还透露,两国达成关于稳定货币汇率的"最终协议",但除此之外,白宫未有公开其他谈判成果。

史剑道认为,该协议应是围绕中国承诺控制人民币汇率,防止人民币贬值过多。他还指出,美国要求中国政府在贸易各个领域减少政府干预,但在货币汇率上希望中国政府减少干预

“货币问题是最容易达成协议的议题,这并不让人惊讶。”史剑道说。

在被问到华为、中兴会否成为贸易协议的一部分,特朗普再次使用了“可能会,可能不会”这个模棱两可的说法。中国通讯巨头中兴、华为在美国及其他西方国家接连遭遇滑铁卢。

本周较早前,特朗普在推特上暗示,美国不会封杀华为、将其从美国的5G网络中排除。

会见刘鹤后,特朗普明确表示不希望用“人为障碍”来封杀华为,而希望建立公平竞争机制,并称他会与司法部讨论华为孟晚舟引渡案。

主持中方谈判团的刘鹤此程带着一个特殊的头衔:“习近平主席特使”。这是他继去年5月后,第二次以此身份访美磋商贸易问题。

本周四,两国代表在美国贸易署进行了长达9小时的会谈。路透社引述信源称,这周的谈判从大纲进入细节,较之前更为艰难。周五,特朗普在白宫椭圆办公室接见中方代表团。上周,中国国家主席习近平在人民大会堂接见了美国贸易代表莱特希泽与财务部长姆努钦。

Tuesday, February 19, 2019

ये र‍िश्ता... में होने जा रहा है नायरा और कार्त‍िक का तलाक

टीवी शो ये र‍िश्ता क्या कहलाता है में इन दिनों नायरा और कार्त‍िक के बीच दूरियां बढ़ गई हैं. इन दूर‍ियों की वजह कार्त‍िक का उठाया कदम है. लेकिन यह बात इतनी आगे तक पहुंच जाती है कि नायरा बहुत जल्द कार्त‍िक को तलाक तक दे सकती है. स्पॉटबाय की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक, शो में नायरा और कार्त‍िक के बीच आई दूर‍ियां एक नई लवस्टोरी को द‍िखाने जा रही हैं.

दरअसल, दोनों के बीच इस कहानी की शुरुआत हुई थी, जब नायरा प्रेग्नेंट थी, उसी वक्त कार्त‍िक की बहन कीर्त‍ि भी प्रेग्नेंट थी. लेकिन एक हादसे में दोनों अस्पताल में एडमिट हो जाते हैं. इस दौरान नायरा का बच्चा मर जाता है और कीर्त‍ि बच्चे को जन्म देने के बाद कोमा में चली जाती है. सीर‍ियल के इस टर्न में कार्तिक एक बड़ा कदम उठाता है. वो कोमा में गई अपनी बहन कीर्त‍ि का बच्चा नायरा को दे देता है. बच्चा बदले जाने की खबर जब कीर्त‍ि के पत‍ि और नायरा के भाई नक्ष को लगती है तो वो नायरा को कार्त‍िक से सारे र‍िश्ते तोड़ने को कहता है.

शो में नक्ष और कार्त‍िक के बीच आई खटास द‍िखाई जा रही है. स्पॉटबाय की रिपोर्ट के मुताब‍िक नायरा और कार्त‍िक के र‍िश्ते में इसका असर आता है. लेकिन

इस बीच नायरा का  एक्सीडेंट हो जाता है और वो अपनी याददाश्त खो बैठती है. अब आने वाले एप‍िसोड में कार्त‍िक एक बार फिर नायरा को पाने की कोश‍िश में लग जाएगा. दोनों के बीच की लव स्टोरी दर्शकों को एक बार फिर नजर आएगी.

67 लाख आधार नंबर लीक हुए हैं, ये दावा है कि फ्रेंच सिक्योरिटी रिसर्चर Robert Baptiste का. इन्होंने इससे पहले भी आधार लीक का खुलासा किया है. मीडियम रॉबर्ट ने एक ब्लॉग लिखा है. इसमें कहा गया है कि इंडिन गैस एजेंसी इंडेन ने 67 लाख आधार नंबर्स लीक कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक डीलर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स के लिए इंडेन की वेबसाइट्स है जहां से ये डेटा लीक हुआ है.

हालांकि इस बार उन्होंने जो दावा किया है वो किसी दूसरे सिक्योरिटी रिसर्चर के हवाले से है जिन्होंने अपनी पहचान जाहिर करने से मना किया है. सिक्योरिटी रिसर्चर ने कस्टम टूल के सहारे 11 हजार इंडेन डीलर्स का कस्टमर डेटा कलेक्ट करने का दावा किया है. इस डेटा में कस्टमर का नाम, पता और आधार नंबर शामिल है.

भारत में इंडेन के 90 मिलियन से ज्यादा कस्टमर्स हैं. आधार की बात करें तो लगभग 90 फीसदी से ज्यादा भारतीय के पास अब आधार है. आधार की सिक्योरिटी को लेकर बहस पहले से ही चलती आई है. इससे पहले भी आधार लीक के कई मामले आए हैं और ये ताजा मामला एक बार फिर से आधार की सिक्योरिटी और प्रिवेसी को लेकर डिबेट शुरू कर सकता है. हालांकि यह थर्ड पार्टी लीक है, इसलिए शायद इस मामले पर UIDAI कुछ न कहे.

हालांकि इस वेबसाइट में ऐक्सेस के लिए यूजरनेम और पासवर्ड की जरूरत होती है, लेकिन इस वेबसाइट का एक पार्ट गूगल में इंडेक्स्ड है. इससे कोई भी लॉगइन पेज को बाइपास करके डीलेट के डेटाबेस में आसानी से एंटर कर सकता है.

Monday, February 11, 2019

घट रही कीटों की संख्या, बढ़ेगा हानिकारक कीड़ों का प्रकोप

कीटों की संख्या को लेकर की गई एक वैज्ञानिक समीक्षा से पता चला है कि 40 प्रतिशत प्रजातियां पूरी दुनिया में नाटकीय ढंग से कम हो रही हैं.

अध्ययन बताता है कि मधुमक्खियां, चींटियां और बीटल (गुबरैले) अन्य स्तनधारी जीवों, पक्षियों और सरीसृपों की तुलना में आठ गुना तेज़ी से लुप्त हो रहे हैं.

मगर शोधकर्ता कहते हैं कि कुछ प्रजातियों, जैसे कि मक्खियों और कॉकरोच (तिलचट्टों) की संख्या बढ़ने की संभावना है.

कीट-पतंगों की संख्या में आ रही इस कमी के लिए बड़े पैमाने पर हो रही खेतीबाड़ी, कीटनाशकों का इस्तेमाल और जलवायु परिवर्तन ज़िम्मेदार है.

धरती पर रहने वाले जीवों में कीटों की संख्या प्रमुख है. वे इंसानों और अन्य प्रजातियों के लिए कई तरह से फ़ायदेमंद हैं.

वे पक्षियों, चमगादड़ों और छोटे स्तनधारी जीवों को खाना मुहैया करवाते हैं. वे पूरी दुनिया में 75 प्रतिशत फसलों के पॉलिनेशन (परागण) के लिए ज़िम्मेदार हैं यानी कृषि के लिए वे बेहद महत्वपूर्ण हैं. वे मृदा को समृद्ध करते हैं और नुक़सान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं.

हाल के सालों में किए गए अन्य शोध बताते हैं कि कीटों की कई प्रजातियों, जैसे कि मधुमक्खियों की संख्या में कमी आई है और ख़ासकर विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में.

मगर नया शोध पत्र बड़े स्तर पर इस विषय में बात करता है.

बायोलॉजिकल कंज़र्वेशन नाम के जर्नल में प्रकाशित इस पत्र में पिछले 13 वर्षों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रकाशित 73 शोधों की समीक्षा की गई है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी जगहों पर संख्या में कमी आने के कारण अगले कुछ दशकों में 40 प्रतिशत कीट विलुप्त हो जाएंगे. कीटों की एक तिहाई प्रजातियां ख़तरे में घोषित की गई हैं.

सिडनी विश्वविद्यालय से संबंध रखने वाले मुख्य लेखक डॉक्टर फ्रैंसिस्को सैंशेज़-बायो ने बीबीसी से कहा, "इसके पीछे की मुख्य वजह है- आवास को नुक़सान पहुंचना. खेती-बाड़ी के कारण, शहरीकरण के कारण और वनों के कटाव के कारण इस तरह के हालात पैदा हुए हैं."

वह कहते हैं, "दूसरा मुख्य कारण है पूरी दुनिया में खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल और कई तरह के ज़हरीले रसायनों के संपर्क में आना. तीसरा कारण जैविक कारण है जिसमें अवांछित प्रजातियां हैं जो अन्य जगहों पर जाकर वहां के तंत्र को नुक़सान पहुंचाती हैं. चौथा कारण है- जलवायु परिवर्तन. खासकर उष्ण कटिबंधीय इलाकों में, जहां इसका प्रभाव ज़्यादा पड़ता है."

अध्ययन में जर्मनी में उड़ने वाले कीटों की संख्या में हाल ही में तेज़ी सी आई गिरावट का ज़िक्र किया गया है. साथ ही पुएर्तो रीको के उष्णकटिबंधीय वनों में भी इनकी संख्या कम हुई है. इस घटनाक्रम का संबंध पृथ्वी के बढ़ते तापमान से जोड़ा गया है.

अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अध्ययन के नतीजे 'बेहद गंभीर' हैं.

ब्रितानी समूह बगलाइफ़ के मैट शार्डलो कहते हैं, "बात सिर्फ़ मधुमक्खियों की नहीं है. मामला परागण या हमारे खाने से भी जुड़ा नहीं है. ये गोबर के बीटल की भी बात है जो अपशिष्टों को रीसाइकल करते हैं. साथ ही ड्रैगनफ़्लाइज़ से भी यह मामला जुड़ा है जो नदियों और तालाबों में पनपते हैं."

"यह स्पष्ट हो रहा है कि हमारे ग्रह का पर्यावरण ख़राब हो रहा है. इस दिशा में पूरी दुनिया को मिलकर गंभीर क़दम उठाने की ज़रूरत है ताकि न सिर्फ़ इस नुक़सान को रोका जाए, बल्कि इससे उबरा भी जाए."

अध्ययन में शामिल रहे लोगों की चिंता है कि कीटों की संख्या में कमी आने से आहार शृंखला प्रभावित हो रही है. पक्षियों, सरीसृपों और मछलियों की कई प्रजातियां खाने के लिए इन कीटों पर निर्भर हैं. नतीजा यह रहेगा कि कीटों के विलुप्त होने से इनकी प्रजातियों के अस्तित्व पर भी संकट आ जाएगा.

भले ही कुछ महत्वपूर्ण कीट विलुप्त होने की कगार पर हैं, कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं जो परिवर्तन के साथ ढलने में कामयाब होती दिख रही हैं.

ससेक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डेव गॉलसन कहते हैं कि गरम जलवायु के कारण तेज़ी से प्रजनन करने वाले कीटों की संख्या बढ़ेगी क्योंकि उनके शत्रु कीट, जो धीमे प्रजनन करते हैं, विलुप्त हो जाएंगे.

Tuesday, February 5, 2019

डोनल्ड ट्रंप ने कहा, किम जोंग उन के साथ वियतनाम में करेंगे बैठक

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ़ द यूनियन स्पीच में घोषणा की है कि वह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ दूसरे शिखर सम्मेलन में इसी महीने भाग लेंगे.

उन्होंने इस सम्मेलन की जगह का ऐलान भी कर दिया है. जहां पिछला सम्मेलन सिंगापुर में हुआ था वहीं दूसरा शिखर सम्मेलन वियतनाम में होगा.

राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने फिर एक बार दक्षिणी सीमा पर दीवार बनाने के वादे को दोहराया.

ट्रंप ने कहा कि वह किम जोंग उन से वियतनाम में 27-28 फ़रवरी को मिलेंगे.

पिछले साल दोनों नेताओं के बीच ऐतिहासिक बातचीत के बाद दूसरे महासम्मेलन की योजनाओं पर काम चल रहा था.

पिछले साल जून में सिंगापुर में ट्रंप और किम के बीच हुई मुलाक़ात अमरीकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरिया नेता के बीच कोई पहली मुलाक़ात थी.

ट्रंप ने कहा, "हमारे बंधक घर आ चुके हैं, परमाणु परीक्षण बंद हो चुके हैं और पिछले 15 महीनों में कोई भी मिसाइल नहीं दागी गई है."

"अगर मैं अमरीका का राष्ट्रपति नहीं चुना गया होता तो मेरे अनुमान में हम अभी तक उत्तर कोरिया के साथ एक बड़े युद्ध में होते."

"बहुत सारा काम अभी होना बाकी है लेकिन किम जोंग उन के साथ मेरे संबंध बेहतर हैं."

उत्तर कोरिया के अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने राजनीतिक एकता पर भी बात की. दो साल तक डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच उतार-चढ़ाव भरे संबंधों के बाद ट्रंप ने राजनीतिक एकता की बात की.

उन्होंने कहा, "हम साथ-साथ दशकों पुराने राजनीतिक गतिरोध को तोड़ सकते हैं."

"हम पुराने विभाजन को पाट सकते हैं, पुराने घावों को भर सकते हैं, नए गठबंधन बना सकते हैं, नए समाधान निकाल सकते हैं और अमरीका के भविष्य के लिए असाधारण वादों को पूरा कर सकते हैं."

Sunday, February 3, 2019

वो दिन, जब महिलाएं असहनीय दर्द से गुजरती हैं

महिलाएं नाज़ुक होती हैं. ऐसा आम तौर पर कहा जाता है. माना जाता है कि जिस्मानी तौर पर वो मर्दों की तरह ताक़तवर नहीं होतीं. लेकिन इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दर्द सहने की क्षमता औरत से ज़्यादा किसी में नहीं है. फिर चाहे वो दर्द शारीरिक हो या जज़्बाती.

दुनिया की हर बालिग़ लड़की को हर महीने माहवारी शुरू होने से पहले दर्द से गुज़रना पड़ता है. कुछ को ये दर्द कम होता है, तो कुछ को नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त. कुछ को दर्द के साथ मितली, उल्टी या बदहज़मी हो जाती है.

माहवारी के दौरान मामूली दर्द होना आम बात है. लेकिन हद से ज़्यादा दर्द होना नॉर्मल नहीं है. फिर ये एक तरह की बीमारी है जिसे एंडोमेट्रियोसिस कहते हैं.

असल में माहवारी से पहले बच्चेदानी के पास ख़ून जमा होता है जो कि फ़र्टिलिटी पीरियड के दौरान स्पर्म नहीं मिलने की सूरत में शरीर से बाहर निकल जाता है. कई बार ये ब्लड टिशू बच्चेदानी के साथ-साथ फैलोपियन ट्यूब, आंत, कोख आदि में जमा हो जाते हैं.

कुछ ख़ास मामलों में तो ये फेफड़ों, आंखों, दिमाग़ और रीढ़ की हड्डी तक में पाए गए हैं. तिल्ली ही शरीर का ऐसा भाग है, जहां आज तक ये ब्लड टिशू नहीं पाए गए हैं.

एंडोमेट्रियोसिस होने पर माहवारी के दौरिन ख़ून बहुत ज़्यादा आता है, पीरियड शुरू होने से पहले कमज़ोरी और थकान होने लगती है, रीढ़ की हड्डी के निचले भाग और कूल्हे की हड्डी में शदीद दर्द होता है.

दुनिया की हर 10 औरतों में से एक को एंडोमेट्रियोसिस की शिकायत है. माना जाता है कि 17 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं इस मर्ज़ से परेशान हैं. आज मेडिकल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रिसर्च हो रही हैं. लेकिन, महिलाओं से जुड़ी बहुत सी बीमारियों पर अभी तक बहुत कम पैसा ख़र्च किया गया है. इन्हीं में से एक है एंडोमेट्रियोसिस.

अमरीका में भी हर 10वीं महिला इसकी शिकार है. फिर भी, यहां महिलाओं से जुड़ी बीमारियों की रिसर्च पर महज़ 60 लाख डॉलर सालाना की रक़म ही ख़र्च की जा रही है. जबकि नींद पर रिसर्च के लिए इस रक़म का 50 गुना अधिक पैसा ख़र्च किया जा रहा है.

एक रिसर्च के मुताबिक़ एंडोमेट्रियोसिस की शिकार महिला ना सिर्फ़ हर महीने दर्द बर्दाश्त करती है, बल्कि अच्छी ख़ासी रक़म इलाज पर भी ख़र्च करती है. यही नहीं कई बार एंडोमेट्रियोसिस की वजह से बांझपन भी हो जाता है. ये दर्द मरीज़ में अन्य किसी दर्द को सहने की ताक़त को भी कमज़ोर करता है.

कहा जाता है कि सबसे पहले चेक वैज्ञानिक कार्ल फ़ोन रोकितांस्की ने 1860 में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान की थी. हालांकि, इसे लेकर कई तरह के मतभेद हैं. कहा जाता है कि ये रिसर्च बहुत बुनियादी माइक्रोस्कोप से की गई थी.

जिस तरह के लक्षण एंडोमेट्रियोसिस में नज़र आते हैं, वैसे ही लक्षण मिर्गी की बीमारी में भी नज़र आते हैं. इसे अंग्रेज़ी में हिस्टीरिया कहते हैं. हिस्टीरिया शब्द लैटिन शब्द से बना है जिसका मतलब है 'पेट से जुड़ा'. इसी आधार पर एंडोमेट्रियोसिस का संबंध हिस्टीरिया से बता दिया जाता है. हालांकि, कोख के दर्द पर की गई बहुत सी रिसर्च इसे ख़ारिज करती हैं.

एंडोमेट्रियोसिस को लेकर ग़लतफ़हमियां पहले भी थीं और आज भी हैं. इसकी बड़ी वजह है इस क्षेत्र में रिसर्च का ना होना. कम जानकारी होने की वजह से कई बार ये बीमारी दशकों तक पकड़ में नहीं आ पाती. एक वजह ये भी है कि महिलाओं को होने वाले दर्द को मामूली दर्द मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.

कैटलिन कोनेयर्स की उम्र 24 साल है. वो माई एंडोमेट्रियोसिस डायरी नाम का ब्लॉग चलाती हैं. उन्हें माहवारी के दौरान ना सिर्फ़ तेज़ दर्द होता था बल्कि ख़ून भी ख़ूब आता था.

अपनी हालत के मुताबिक़ उन्होंने नेट पर जानकारी हासिल की. उनकी रिसर्च इस नतीजे पर पहुंची कि उन्हें एंडोमेट्रियोसिस है. उन्होंने अपने डॉक्टर से कहा भी कि हो सकता है उन्हें एंडोमेट्रियोसिस हो लेकिन उनकी बात को ख़ारिज कर दिया गया.

ऑक्सफ़ोर्ड के विंसेंट का कहना है कि जेंडर इसमें बहुत बड़ा रोल निभाता है.

आम तौर पर शुरूआती जांच में डॉक्टर भी दर्द की वजह से होने वाले घावों को देख नहीं पाते. ऐसे बहुत से केस हैं जब एंडोमेट्रियोसिस के स्कैन में अल्ट्रासाउंड नेगेटिव आए हैं.

Friday, February 1, 2019

20 लाख हुई ग्रेच्‍युटी लिमिट, नौकरीपेशा लोगों को सरकार का तोहफा

नौकरीपेशा लोगों को मोदी सरकार की ओर से बड़ी राहत दी गई है. दरअसल, सरकार की ओर से कर्मचारियों की ग्रेच्युटी लिमिट को डबल कर दिया गया है. पहले यह लिमिट 10 लाख की थी जो अब 20 लाख रुपये हो गई है. बता दें कि ग्रेच्युटी का भुगतान अधिनियम, 1972  के तहत नौकरीपेशा कर्मचारियों को ग्रेच्‍युटी दी जाती है. यह उन सभी संस्‍थानों पर लागू होता है, जिसमें 10 या इससे अधिक कर्मी होते हैं.

इसका मकसद कर्मचारियों को उनके रिटायर होने के बाद सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना होता है. कर्मचारी अगर कंपनी या संस्‍थान में रिटायरमेंट के बाद या फिर शारीरिक अपंगता की वजह से काम करना बंद कर दे तो उसे शर्तों के साथ ग्रेच्‍युटी मिलती है. ग्रेच्युटी किसी भी कर्मचारी को तभी मिलती है जो नौकरी में लगातार करीब 5 साल तक काम कर चुका हो. ऐसे कर्मचारी की सेवा को पांच साल की अनवरत सेवा माना जाता है. आमतौर पर 5 साल की सर्विस के बाद ही कोई कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता है.

कैसे कैलकुलेट करें ग्रेच्‍युटी

आमतौर पर लोगों को अपनी ग्रेच्‍युटी का पता नहीं होता है लेकिन इसका कैलकुलेशन बेहद आसान है. दरअसल, 5 साल की सर्विस के बाद सेवा में पूरे किए गए हर साल के बदले अंतिम महीने के बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते को जोड़कर उसे पहले 15 से गुणा किया जाता है. इसके बाद सर्विस में दिए गए सालों की संख्या से भाग दिया जाता है. इसके बाद हासिल होने वाली रकम को 26 से भाग दे दिया जाता है. जो रकम बनती है वही आपकी ग्रेच्युटी है.

मोदी सरकार ने गाय के लिए भी बजट में विशेष तवज्जो दी है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार ने राष्ट्रीय कामधेनु योजना का ऐलान. इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट देने का ऐलान किया है. पीयूष गोयल ने बजट में ऐलान किया कि पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज मिलेगा

दरअसल विपक्ष खासकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार को लगातार घेरते रहे हैं. कर्ज माफी को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है. इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल के महीनों में दिल्ली ये लेकर यूपी और महाराष्ट्र तक की सरकारें किसान आंदोलन की तपिश झेल चुकी हैं.

मोदी सरकार ने अंतरिम बजट 2019 में आयकर छूट (income tax) की सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है. लोकसभा चुनाव से पहले सवर्ण आरक्षण के बाद यह मोदी सरकार का दूसरा सबसे बड़ा दांव है. हालांकि, 5 लाख से ज्यादा आय वाले लोगों को इससे फायदा नहीं होगा क्योंकि सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है. पांच लाख से ज्यादा आय वाले लोगों को टैक्स राहत पर पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्ण बजट में इसपर फैसला हो सकेगा.

दरअसल नए ऐलान के अनुसार नौकरी-पेशा लोगों के लिए राहत का ऐलान हुआ. इसमें 5 लाख रुपये तक की कमाई वाले लोग टैक्स फ्री होंगे. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है यानी कि 5 लाख से ज्यादा कमाई वाले लोगों के लिए अब भी राहत ढाई लाख तक की ही हैं. लेकिन जिनकी आय 5 लाख से नीचे है उनके लिए राहत 5 लाख तक है. वर्तमान स्लैब के अनुसार ढाई से 5 तक लाख रुपये तक की कमाई पर 5 फीसदी आयकर देना पड़ता था. ये नियम 5 लाख से ज्यादा कमाई वालों के लिए जारी रहेगा. यानी जिनकी आमदनी 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें पुराने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना ही पड़ेगा.